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14 घंटे बाद भरा गया पंचनामा, सीमा विवाद में उलझी पुलिस

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14 घंटे बाद भरा गया पंचनामा
सीमा विवाद में उलझी पुलिस
- खुर्जा रोड पर बुधवार शाम को दुर्घटना में हुई थी मामा-भांजे की मौत
- बृहस्पतिवार सुबह खुर्जा देहात पुलिस ने आखिरकार भरा पंचनामा
अमर उजाला ब्यूरो
बुलंदशहर। मित्र पुलिस की कार्यप्रणाली से एक बार फिर पीड़ित परिवार को परेशानियों का सामना करना पड़ा। देहात कोतवाली पुलिस व खुर्जा देहात पुलिस दुर्घटना स्थल को लेकर सीमा विवाद में करीब 14 घंटे तक उलझी रही और तब तक मृतकों के शव मोर्चरी में रखे रहे। हालांकि, बाद में खुर्जा देहात पुलिस ने दोनों मृतक मामा-भांजे का पंचनामा भर पोस्टमार्टम कराया।
बता दें कि खुर्जा देहात क्षेत्र के गांव हजरतपुर निवासी मुनीश अपनी बहन क्षमा, भांजे कार्तिक व एक अन्य बच्चे के साथ चोला क्षेत्र में किसी रिश्तेदारी में गए थे। बुधवार देर शाम करीब सात बजे वह बाइक से वापस गांव लौट रहे थे। तभी गांव धमैड़ा नारा स्थित एमआईटी कालेज के निकट सामने से आ रही एक बाइक ने उनकी बाइक में टक्कर मार दी थी, जिसमें मुनीश व उसके भांजे कार्तिक की मौके पर ही मौत हो गई थी। जबकि बहन क्षमा को हायर मेडिकल सेंटर रेफर कर दिया गया था। पुलिस भी मौके पर पहुंच गई थी। घटनास्थल देहात कोतवाली बुलंदशहर और खुर्जा देहात थाने क्षेत्र में आता है। पुलिस की कार्यप्रणाली यहां सवालों में घिरती नजर आई। घटना को बृहस्पतिवार सुबह दस बजे तक 14 घंटे से अधिक का समय बीत चुका था और मृतकों के परिजन कभी देहात कोतवाल, कभी चोला चौकी तो कभी खुर्जा देहात थाने में तहरीर लेकर घूमते रहे। लेकिन हर बार उन्हें पुलिस के द्वारा सीमा विवाद का हवाला देकर पल्ला झाड़ लिया जाता था। जैसे-तैसे बृहस्पतिवार सुबह को खुर्जा देहात पुलिस ने मामले में पंचनामा भर कर मृत मामा-भांजे का पोस्टमार्टम कराया। पुलिस की इस कार्यप्रणाली से परिजनों में भी काफी रोष है। हजरतपुर प्रधान राहुल सोलंकी ने बताया कि घंटों तक पुलिस पीड़ित परिजनों को सीमा विवाद में उलझाती रही थी। बृहस्पतिवार सुबह करीब दस बजे के बाद खुर्जा देहात पुलिस ने पंचनामा भर पोस्टमार्टम कराया है। देहात कोतवाल तपेश्वर सागर ने बताया कि मामले की सूचना नहीं थी। मामले में खुर्जा देहात पुलिस ने कार्रवाई की है।
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जीरो एफआईआर भी की जा सकती थी दर्ज
मानवता को तार-तार कर पुलिस मासूम भांजे और उसके मामा के शव को घंटों मोर्चरी में रखे रही। कानून के जानकारों की मानें तो पुलिस को सीमा विवाद जैसे मामलों में पीड़ित पक्ष की हर संभव मदद के लिए जीरो एफआईआर दर्ज करनी चाहिए। अधिवक्ता ब्रूनो भूषण ने बताया कि घटना के बाद जिस भी थाने की पुलिस पहले मौके पर पहुंची थी, यदि वही अपने थाने में जीरो एफआईआर दर्ज कर शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज सकती थी। जांच के दौरान दूसरे थाने की सीमा सामने आती तो विवेचना संबंधित थाने में ट्रांसफर कर सकते थे।
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