इस साल गेहूं खरीद महज 24 हजार मीट्रिक टन पर सिमटकर रह गई है। एजेंसियों ने क्रय केंद्रों पर लगे कांटा-बाट समेट लिए हैं। बता दें कि शासनादेश के हिसाब से 15 जून तक जनपद में गेहूं खरीद होनी थी।
इस बार 1.53 लाख एमटी गेहूं खरीदा जाना था। इसके लिए मार्केटिंग विभाग ने 93 क्रय केंद्रों की स्थापना की थी। शुरूआत के 10 दिन में गेहूं खरीद काफी पिछड़ गई थी। हालांकि मई माह में गेहूं खरीद ने जरूर रफ्तार पकड़ी।
अब तक 24 हजार एमटी गेहूं जनपद की सभी क्रय एजेंसियों ने खरीदा है। किसान सुदर्शन का कहना है कि मंडियों में गेहूं का रेट 1600 रुपये क्रास कर चुका है। जबकि क्रय केंद्रों पर 1525 रुपये के हिसाब से गेहूं खरीदते हैं।
इस संबंध में जिला विपणन अधिकारी वीके विदवा ने बताया कि समर्थन मूल्य कम और मंडियों का रेट अधिक होने से यह समस्या सामने आई है।