वे लगातार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भी अदालत में उपस्थित नहीं हो रही हैं, इसलिए उनकी उपस्थिति सुनिश्चित कराई जाए। पत्रावली का अवलोकन करने के बाद न्यायाधीश ने पाया कि यह प्रकरण करीब 6 वर्ष पुराना है। साक्षी विवेचक के बयान दर्ज कराने के लिए अदालत लगातार कार्रवाई कर रही है, इसके बावजूद वह पेश नहीं हो रही हैं।
अदालत ने इसे गंभीरता से लेते हुए साक्षी के आचरण के मद्देनजर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 389 के तहत नम्रता श्रीवास्तव के खिलाफ प्रकीर्ण वाद दर्ज करने के निर्देश दिए। अदालत ने उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये साक्ष्य देने के लिए 11 सितंबर की तिथि नियत की है। साथ ही आदेश की एक प्रति तत्काल ई-मेल के जरिये पुलिस कमिश्नर, पुलिस कमिश्नरेट वाराणसी को भेजने का निर्देश दिया है, जिससे कि आदेश का अनुपालन हो सके।