बुलंदशहर। जहांगीराबाद क्षेत्र में करीब साढ़े तीन साल पहले दुष्कर्म पीड़िता को जिंदा जलाकर मारने के मामले में विशेष न्यायाधीश एससीएसटी एक्ट धीरेंद्र कुमार तृतीय के न्यायालय ने आरोपी पति-पत्नी को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने दोनों दोषियों पर 50-50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया। अन्य आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया है।
अभियोजन पक्ष ने बताया कि जहांगीराबाद थाना क्षेत्र के एक गांव में 14 अगस्त 2020 को नाबालिग के साथ दुष्कर्म की घटना हुई थी। मामले में पीड़िता के परिजनों ने मुकदमा दर्ज कराया था। इसके बाद से ही आरोपी पक्ष लगातार पीड़िता और उसके परिवार पर फैसले के लिए दबाव बना रहा था। फैसला न करने पर उन्हें जान से मारने की धमकियां दी जा रही थीं। घटना वाले दिन 17 नवंबर 2020 को जब पीड़िता के माता-पिता घर से बाहर गए थे, तभी आरोपी पक्ष के लोग घर में घुस गए और दुष्कर्म पीड़िता को पेट्रोल छिड़क कर जला दिया।
गंभीर हालत में पीड़िता को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। पुलिस ने मामले में 12 मार्च 2021 को न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने गवाहों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने आरोपी संजय और उसकी पत्नी काजल को जघन्य अपराध का दोषी पाया। कोर्ट ने दोनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई और कहा कि समाज में ऐसे अपराधों के लिए कोई जगह नहीं है। दोषियों को ऐसे जघन्य अपराध के लिए सख्त सजा देना ही प्रावधान है।