कोरोना का कहर : आज उठनी थी शिक्षिका की डोली, उठी अर्थी
बुगरासी। क्षेत्र के गांव बनभोरा निवासी एक शिक्षिका की सोमवार को बरात आनी थी। लेकिन, डोली उठने से पहले ही कोरोना ने उसकी जिंदगी लील ली। सोमवार सुबह उनका अंतिम संस्कार किया गया। शिक्षिका का गाजियाबाद के यशोदा अस्पताल में इलाज चल रहा था। मौत से परिजनों का रो रोकर बुरा हाल है।
बनभोरा निवासी सुरेंद्र सिंह की 27 वर्षीय पुत्री रश्मि जनपद बदायूं के उझानी ब्लॉक स्थित हजरतगंज गांव के प्राइमरी पाठशाला में शिक्षिका थीं। रश्मि की 19 अप्रैल को ब्लॉक डहगवां के गांव सिरसोल में चुनाव ड्यूटी थी। परिजनों ने बताया कि रश्मि 20 अप्रैल को अपने गांव वापस आईं तो उन्हें बुखार था। रश्मि का इलाज कराया गया, लेकिन कुछ आराम नहीं हुआ। 27 अप्रैल को रश्मि को बुलंदशहर ले जाया गया। जहां हालत खराब होने पर उसे हायर मेडिकल सेंटर रेफर कर दिया गया था। जिसके बाद उन्हें गाजियाबाद के यशोदा अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया था। जहां जांच के दौरान उनकी कोरोना रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई थी। जिसके बाद से लगातार उनका उपचार चल रहा था। बताया गया कि रविवार की रात इलाज के दौरान रश्मि का निधन हो गया। जानकारी मिलते ही परिजनों का रो रोकर बुरा हाल है। बताया गया कि रश्मि अपने परिवार में सबसे बड़ी थी। रश्मि के दो छोटे भाई हैं। अस्पताल की एंबुलेंस से रश्मि के पार्थिव शरीर को सोमवार सुबह बसीबांगर गंगाघाट लाया गया, जहां उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया।
बीमारी के चलते टाली गई थी शादी
परिजनों ने बताया कि कुछ समय पूर्व ही रश्मि का रिश्ता अमरोहा निवासी युवक से तय हुआ था। रश्मि की 10 मई को शादी थी, अमरोहा से बरात आनी थी। चुनाव ड्यूटी से वापस लौटने पर बुखार के चलते और हालत गंभीर होने पर फिलहाल उनकी शादी टाल दी गई थी। रविवार को असमय रश्मि की मौत ने परिजनों को झकझोर कर रख दिया है।