पावर कारपोरेशन के ठेकेदार हर माह संविदाकर्मियों का कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) का लाखों रुपये डकार रहे हैं। संविदाकर्मियों की जगह परिचितों के नाम पर ईपीएफ जमा किया जा रहा है।
फर्जीवाड़े का खुलासा होने के बाद अधीक्षण अभियंता ने जांच के आदेश दिए हैं। जनपद के करीब 120 बिजलीघरों पर करीब 600 संविदाकर्मी तैनात हैं।
ठेका प्रथा पर तैनात इन कर्मियों को करीब आठ हजार रुपये मानदेय दिया जाता है। इन कर्मियों के वेतन से 12.5 फीसदी ईपीएफ काटा जाता है। इतना ही ईपीएफ विभाग इनके खाते में जमा करता है।
कर्मियों के खाते में जाने वाला ईपीएफ का यह पैसा ठेकेदारों के परिचितों के खाते में जा रहा है। ईपीएफ के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा किया जा रहा है। कर्मचारियों से कटने वाला और विभाग द्वारा जमा किए जाने वाला ईपीएफ का लाखों रुपये हर महीने ठेकेदारों की जेबों में जा रहा है।
ठेकेदारों के बेटे-भाई हैं कर्मी
फर्जीवाड़े का आलम ये है कि कई ठेकेदारों ने अपने भाई, बेटे, पिता, भतीजे आदि को कर्मचारी के रूप में दिखा दिया है। जबकि बिजलीघरों से इनका दूर-दूर तक का कोई वास्ता नहीं है। ईपीएफ का यह पैसा इन्हीं के खाते में पहुंच जाता है।
संविदाकर्मियों को कम वेतन दे रहे और ईपीएफ का पैसा डकार रहे कुछ ठेकेदारों से पहले ही एग्रीमेंट रद्द कर दिए गए थे। मामला संज्ञान में आया है कि कुछ ठेकेदारों द्वारा ईपीएफ के पैसों में फर्जीवाड़ा किया जा रहा है। पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। दोषी ठेकेदार का करार रद्द कर दिया जाएगा।
राकेश कुशवाहा, अधीक्षण अभियंता
ठेकेदार-अफसरों के गठजोड़ के कारण संविदाकर्मियों का शोषण किया जा रहा है। ईपीएफ का पैसा काटा जा रहा है, लेकिन कर्मियों के खातों में जमा नहीं हो रहा है। इसके अलावा कर्मियों को शासन से मिल रहे मानदेय से काफी कम वेतन दिया जा रहा है।
सुरेंद्र सिंह, सचिव, बिजली इंपलाइज यूनियन