वाजिब मुआवजे की मांग कर विधायक सिकंदराबाद ने केंद्र सरकार की डेडीकेटेड फ्रेट कॉरीडोर योजना का रास्ता रोक दिया है। योजना के लिए अधिग्रहित की गई 18 गांवों की जमीनों में विधायक विमला सोलंकी की कृषि भूमि भी शामिल है।
किसान यमुना एक्सप्रेस-वे की तर्ज पर मुआवजे की मांग कर रहे हैं। विधायक ने एलान किया है कि रेलवे को मुआवजा बढ़ाना होगा। ऐसा नहीं होने से किसान जमीन नहीं देंगे।
रेलवे अफसर और विधायक के दरम्यान अब तक तीन चरणों की वार्ता हो चुकी है। तीसरे चरण की वार्ता में भी कोई नजीता नहीं निकला।
विधायक विमला सोलंकी का कहना है कि यमुना एक्सप्रेस वे पर दो हजार रुपये मीटर से भी अधिक किसानों को मुआवजा दिया गया है। यमुना एक्सेप्रस-वे से चोला क्षेत्र की दूरी ज्यादा नहीं है। ऐसे में यहां किसानों को कम मुआवजा दिया जा रहा है।
बता दें कि कलंदर गढ़ी, सिकंदरपुर, समसपुर, कमालपुर, खबरा, खानपुर, कादिरपुर, नगला बंसी, वैर, बादशाहपुर, निठारी, भौरा, रौनी,अरनिया-कमालपुर, फतहपुर उर्फ कमरंदपुर, गांगरौल, फतहपुर जादों, अरोड़ा गांव की जमीन अभी तक अधिग्रहित की गई है इसमें विधायक विमला सोलंकी की गांव खानपुर में जमीन अधिग्रहित की गई थी।
250 से 450 रुपये मिला मुआवजा
किसानों को कहना है कि रेलवे ने 250 से 450 रुपये मीटर के हिसाब से मुआवजा दिया। आज एक मीटर कपड़े कीमत 250 रुपये से कहीं ज्यादा हो गई है।
जब तक वाजिब मुआवजा नहीं मिलेगा तब तक किसान जमीन से कब्जा नहीं छोड़ेंगे। रेलवे का मुआवजा निर्धारण का आधार गलत है। - विमला सोलंकी, विधायक, सिकंदराबाद