फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गलत नाम और पते पर भी समितियों ने बेचा यूरिया

विज्ञापन
विज्ञापन
गलत नाम और पते पर भी समितियों ने बेचा यूरिया
विज्ञापन

बुलंदशहर। जनपद में 20 किसानों को 8709 कट्टा यूरिया बेचा गया था, अब उसकी जांच में खुलासा हुआ है कि समितियों ने गलत नाम और पते पर भी यूरिया बेचा था। इससे पहले समिति के चौकीदार, चपरासी और पल्लेदार को यूरिया बेचने का मामला उजागर हो चुका है।
जनपद में जिन 20 किसानों की जांच चल रही है। उनकी यह सूची केंद्र सरकार ने जारी की है। जांच में यह पहले ही खुलासा हो चुका है कि इसमें शामिल नाम किसानों के नहीं, बल्कि समिति के चौकीदार, चपरासी और पल्लेदारों के हैं और उन्हीं के नाम पर यूरिया बेचा गया। एक समिति द्वारा अलीगढ़ निवासी किसान को भी यूरिया बेचने का मामला सामने आ चुका है। पूरे मामले की चल रही जांच में अब सामने आया है कि उक्त समितियों ने गलत नाम और पते पर भी यूरिया बेचा था। केंद्र सरकार से प्राप्त हुई सूची में आखिरी नाम महिला दीप्ति का है। जबकि अब जांच में खुलासा हुआ है कि यह नाम गलत है और उक्त समिति ने महिला दीप्ति के नाम और पते नहीं, बल्कि किसी अन्य के नाम और पते पर यूरिया बेचा था। अफसरों ने यह भी बताया कि जांच जारी है और जल्द ही पूरी रिपोर्ट मिलने के बाद आगामी कार्रवाई की जाएगी। जिला कृषि अधिकारी अश्विनी कुमार सिंह का कहना है कि पूरे मामले की जांच चल रही है और जल्द ही रिपोर्ट बनाकर डीएम को सौंप दी जाएगी।
विज्ञापन

यूरिया की कमी डालेगी फसल उत्पादन पर असर
बुलंदशहर। जनपद में चल रही यूरिया कमी से फसलों की उत्पादकता पर असर पड़ सकता है। इससे किसानों की आय भी घट सकती है। इसे लेकर किसान चिंतित हैं और वह जिला प्रशासन और शासन से जल्द से जल्द यूरिया की कमी को दूर करने की मांग कर रहे हैं। अफसरों का दावा है कि यूरिया की रैक जल्द आने वाली है।
विज्ञापन

कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार जनपद में 3.75 लाख हेक्टेयर भूमि में फसल उगाई जाती है। जबकि लगभग चार लाख किसान खेती से जुड़े हुए हैं। इस समय धान, ईंख के अलावा सब्जी, मक्का, ज्वार, दलहन आदि की फसल उग रही हैं। इस समय सभी फसलों के लिए यूरिया की सबसे ज्यादा जरूरत है। बताया गया कि चालू सीजन में जनपद को 50 हजार मीट्रिक टन यूरिया की जरूरत है। लेकिन शासन की ओर से 39 हजार 761 मीट्रिक टन यूरिया का लक्ष्य दिया गया है। इसमें से लगभग 33 हजार मीट्रिक टन यूरिया प्राप्त हो सका है। अब यूरिया की कमी के चलते किसानों को अपनी फसल की उत्पादकता कम होने और आय कम होने की भी चिंता सताने लगी है। गांव रहमापुर स्यावली के प्रगतिशील किसान ओमपाल सिंह, भैसरोली नासिरपुर के किसान गंगा प्रसाद शर्मा और सत्तन सिंह का कहना है कि इस समय धान सहित दलहन और सब्जी की फसलों के लिए यूरिया की सबसे ज्यादा जरूरत है। फसल को तैयार करने में यूरिया सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि इस समय फसलों को यूरिया नहीं मिली तो उत्पादकता कम होने के साथ किसानों की आय कम हो सकती है। वहीं, दूसरी ओर जनपद में यूरिया की कमी की समस्या और बढ़ गई है। किसान यूरिया के लिए मारे-मारे फिर रहे हैं। जिला कृषि अधिकारी अश्विनी कुमार सिंह ने बताया कि यूरिया की जल्द ही जनपद में रैक पहुंचने वाली है। यह रैक बुधवार को पहुंच सकती है। इसके पहुंचने के बाद यूरिया की कमी कुछ हद तक दूर हो जाएगी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें