‘बेघरों’ के लिए बनाए गए 500 आशियानें सियासी दांव-पेच में फंस गए हैं। जिले के गरीबों के लिए तत्कालीन बसपा सरकार ने पांच साल पहले कांशीराम आवास का निर्माण कराया था लेकिन निजाम बदला तो सिर्फ रंगाई-पुताई और पानी का बंदोबस्त कराने में पांच साल गुजर गए।
जानकारी के अनुसार बुलंदशहर विकास प्राधिकरण (बीडीए) ने गरीबों के लिए पांच साल पहले वलीपुरा नहर के पास और औरंगाबाद में बस अड्डे के पास कांशीराम आवासों का निर्माण करवाया था। औरंगाबाद में 100 और बुलंदशहर में 400 आशियानें बनाए गए हैं।
महज रंगाई-पुताई और जल निकासी का काम पूरा करना है लेकिन आलम यह है कि इस काम में ही वर्तमान सरकार को साढ़े चार साल गुजर गए हैं। अब इन आवासों की दीवारें भी गिरने लगी है।
मौजूदा सरकार में गरीबी के मानदंड भी बदल गए हैं। इन कांशीराम आवासों का आवंटन भी हो चुका है। सरकार नहीं चाहती की पुरानी सरकार का प्रोजेक्ट पूरा हो और उसे विधानसभा चुनावों में दूसरे को इसका लाभ मिले।
इसी के चलते कांशीराम आवासों का निर्माण पूरा नहीं करवाया गया है। 500 कांशीराम आवासों के लिए जनपद में करीब 10 हजार आवेदन प्राप्त हुए है। आवेदन को ऑनलाइन कर दिया गया है। पिछले दिनों गरीबी का पता लगाने के लिए मुफलिस परिवारों का सर्वे भी कराया गया था। आवासीय योजना तैयार करने में प्राधिकरण का करीब सात करोड़ रुपये खर्च हुआ है।