जनपद की 225 बैंक शाखाओं में कैश खत्म हो गया है। दो दिन का लगातार अवकाश होने पर चल रहे इक्का-दुक्का एटीएम भी रविवार को जवाब दे गए। ऐसे में आम आदमी की जेबें खाली हो गईं। इसक असर वीकेंड पर होटल और रेस्टोरेंटों में रोज दिखने वाली चहल-पहल पर दिखा।
जनपद में 256 बैंक शाखाएं हैं। इनमें से 225 बैंक शाखाओं में कैश खत्म हो गया है। शहर की शाखाओं में 10 और पांच रुपये के सिक्के हैं। 100 रुपये के नोट की पुरानी करेंसी भी नहीं है। एलडीएम सतपाल मेहता के मुताबिक सोमवार को 10 करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है।
वहीं, रविवार को वह लोग जिनके घर पर शादी ब्याह का आयोजन एक दो दिन में है वह लोग जुगाड़ बनाते दिखाई दिए। कई लोगों ने अपने जानकार अफसरों से बुलंदशहर के अफसरों को फोन कराए मगर स्थानीय अफसरों के चेहरे पर सिवाय बेबसी के कुछ नहीं दिखा।
लीड बैंक अफससर सतपाल मेहता ने बताया कि बहुत शाखा में थोड़ा कैश बचा है। सोमवार को 10 करोड़ की करेंसी नहीं मिली तो हालात पहले से भी बदतर हो जाएंगे।
करेंसी के जरूरतमंदों की पहचान नहीं कर सका प्रशासन
नोट बंदी के 19 दिन बाद भी प्रशासन के अधिकारी नई करेंसी के जरूरतमंदों की पहचान नहीं कर सके। डीएम ने जहां नई करेंसी लोगों की पहुंच से दूर है, उन क्षेत्रों को चिंहित कर कैश वैन चलाने का आदेश दिया था। आदेश के क्रम में डीएम ने तीन अफसरों की टीम क्षेत्र चिंहित करने के लिए गठित कर दी, मगर अब तक एक भी स्थान चिंहित नहीं किया गया है।
ऐसे में आप समझ सकते हैं गांव में रहने वाले किसान मजदूर का हाल बिन रुपया पैसे कैसा होगा। दूर दराज बसे गांवों में कैश वैन नहीं पहुंचने से सबसे अधिक परेशानी किसानों को उठानी पड़ रही है। डीएम आंजनेय कुमार सिंह ने बताया कि बैंक सभी उपभोक्ताओं की पकड़ में हैं। जहां कहीं भी कैश की समस्या आएगी वहां स्वैप मशीन को भेजा जाएगा।