शिकारपुर में हर साल की तरह इस साल भी शिया समुदाय द्वारा परंपरागत जुलूस-ए-अमारी का आयोजन किया गया। जुलूस में बढ़ चढ़कर अकीदतमंदों ने हिस्सा लिया और इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों को पुरसा दिया।
बुलंदशहर जिले की शिकारपुर तहसील में बुधवार 20 अगस्त को परंपरागत जुलूस-ए-अमारी का आयोजन किया गया। यह जुलूस वर्ष 1984 से लगातार आयोजित हो रहा है और हर साल की तरह इस बार भी अकीदतमंदों की भारी भीड़ उमड़ी। इस जुलूस की शुरुआत हकीम अली शाह के आवास से शुरू हुई कर्बला पर जाकर खत्म होगी।
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करीब दोपहर 1 बजे शुरू हुआ यह जुलूस कस्बे के हर इलाकों से गुजरता हुआ शाम 7 बजे कर्बला में जाकर खत्म होगा। इस दौरान कस्बे की मशहूर अंजुमन-ए-अकबरी की अगुवाई में पुरदर्द नौहे पढ़े गए। शिकारपुर के तमाम नौहेख्वानों ने मंच संभाला और गम-ओ-अहद का माहौल बना दिया। नौहों की दर्दभरी सदा से पूरा कस्बा मातमी रंग में डूब गया।
वहीं, इस जुलूस की रौनक बढ़ाते हुए अलम-ए-मौला अब्बास भी निकाला गया, जिस पर अजादारों ने गहरा इजहार-ए-अकीदत किया। जगह-जगह सबील का आयोजन हुआ, जहां अजादारों को शर्बत और पानी पिलाया गया।
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वहीं, महिलाओं और बच्चों की भी भारी तादाद इस मातमी जुलूस में रही। गम और शोक का आलम ऐसा रहा कि नौहों की पुरदर्द आवा से अजादारों की आंखें नम हो उठीं। इसी दौरान यह भी कहा गया कि आज के दिन रोज-ए-रसूल सजता है लोगों के साथ जुलूस भी उसका तवाफ करते हैं।
कस्बे के जिम्मेदार लोग रहे मौजूद
इस जुलूस के संरक्षक मुमताज हैदर और इकबाल हैदर रहे, जबकि सदारत मोहम्मद अब्बास एवं तालिब हुसैन ने की। पूरे कस्बे में जुलूस के दौरान अकीदतमंदों का हुजूम उमड़ पड़ा और मातमी माहौल देर शाम तक कायम रहा।
सुरक्षा की रही चाक चौबंद व्यवस्था
सुरक्षा की दृष्टि से स्थानीय प्रशासन ने पुख्ता इंतजाम किए थे। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी लगातार निगरानी में जुटे रहे, जिससे जुलूस शांति और अनुशासन के साथ सम्पन्न हुआ।