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जिला अस्पताल में चार घंटे तक लीकेज होती रही ऑक्सीजन

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जिला अस्पताल में चार घंटे तक लीकेज होती रही ऑक्सीजन
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बुलंदशहर। जिला अस्पताल में बड़ा हादसा होते-होते टल गया। शनिवार को चार घंटे तक ऑक्सीजन लीकेज होती रही, लेकिन अस्पताल प्रशासन को भनक तक नहीं लग सकी। जबकि लीकेज स्थल सीएमएस कार्यालय से चंद कदमों की दूरी पर था। ज्वलशील पदार्थ के प्रयोग करने से वहां आग लग सकती थी। सबसे बड़ी लापरवाही यह रही कि शिकायत करने के एक घंटे बाद तक ऑक्सीजन लीकेज की प्रक्रिया को नहीं रोका गया। उच्चाधिकारियों के मामला संज्ञान में आने पर ऑक्सीजन प्लांट को बंद कराया गया।
कोरोना काल की दूसरी लहर में ऑक्सीजन की मारामारी को देखते हुए जिला अस्पताल में एक हजार लीटर क्षमता का ऑक्सीजन प्लांट स्थापित किया गया था। यहां से अस्पताल के सभी वार्डों में प्रत्येक बैड पर ऑक्सीजन की आपूर्ति दी जा रही है। कोरोना काल के समय हालात ऐसे रहे कि लोगों को ऑक्सीजन लेने के लिए 100 किलोमीटर तक दौड़ लगानी पड़ी थी, लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं हो सका था। ऑक्सीजन की कमी के कारण कोरोना काल के समय कई लोगों की जानें चली गई थीं। वहीं, कोविड काल के दौरान पिछले वर्ष नासिक में मरीजों को सप्लाई होने वाली ऑक्सीजन के प्लांट से ऑक्सीजन गैस लीकेज होने से 22 लोगों की मौत हो गई थी। इन बातों का जिला अस्पताल प्रशासन पर कोई फर्क नहीं पड़ा। शनिवार दोपहर करीब 12 बजे एक व्यक्ति डेंगू वार्ड से जा रहा था, तभी कोई आवाज सुनाई देने पर पता चला की ऑक्सीजन पाइप लाइन लीकेज हो रही है। इसकी सूचना अस्पताल के एक कर्मी को दी।
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अस्पताल कर्मी ऑक्सीजन पाइप लाइन चोरी होने का बता रहे कारण
अस्पताल के कर्मचारी ने बताया कि डेंगू वार्ड में कई दिन पूर्व किसी व्यक्ति द्वारा पाइप लाइन चोरी करने का प्रयास किया गया। लेकिन पाइप को काटकर छोड़ गया। पाइप को जोड़े जाने के लिए संबंधित कार्यदायी संस्था को अवगत कराया गया। लेकिन कोई कर्मी न आने के कारण पाइप लाइन में से ऑक्सीजन लीकेज होती रहती है। वहीं, ऑक्सीजन लीकेज होने से मरीजों को नाममात्र ही ऑक्सीजन पहुंच रही थी। बाकी सब लीकेज में बर्बाद हो रही थी।
वार्ड खाली होने से राहत
डेंगू वार्ड की छत से पानी टपकता रहता है। इसके चलते वार्ड खाली रहता है। वहीं, डेंगू वार्ड के आसपास अन्य वार्ड भी पिछले कई दिनों से खाली है। यदि वार्ड में कोई चहल-पहल होती तो हो सकता था कोई ऑक्सीजन लीकेज के आसपास ज्वलनशील पदार्थ का प्रयोग या धूम्रपान करता तो लीकेज में आग पकड़ लेती और बड़ा हादसा हो सकता था। लेकिन वार्ड पिछले काफी समय से खाली होने के कारण हादसा बच गया।
बिना ऑपरेटर के संचालित हो रहा ऑक्सीजन प्लांट
जिले में तीसरी लहर के दौरान 14 ऑक्सीजन प्लांट तैयार किए गए। इस दौरान जिले में सबसे बड़ा एक हजार एलपीएम क्षमता का ऑक्सीजन प्लांट लगाया गया है। जो पीएम केयर फंड से बनकर तैयार हुआ। वहीं, जिला अस्पताल समेत अन्य चिकित्सालयों में बने ऑक्सीजन प्लांट बिना ऑपरेटर के संचालित हो रहे हैं। प्रशिक्षित व्यक्ति न होने के कारण हादसे की संभावना बनी रहती है।
प्योर ऑक्सीजन होती है खतरनाक
चिकित्सकों के अनुसार, शरीर में प्योर ऑक्सीजन कई केमिकल रिएक्शन को अंजाम देती है। कभी-कभी ऑक्सीजन खतरनाक भी हो सकती है। ऑक्सीजन खुद से कभी नहीं जलती बल्कि आग जलने या उसे जलाए रखने में मदद करती है। इसलिए जहां भी उसे स्टोर किया जाता है उस जगह जलने वाले चीजें नहीं होनी चाहिए। जैसे अल्कोहल सॉलवेंट्स, पेट्रोलियम या पेपर आदि नहीं रखे जाने चाहिए, खुली आग, चिंगारी, किसी जलने वाली चीज से पैदा होने वाली ऊष्मा, रेडिएंट हीटर आदि नहीं होने चाहिए।
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ऑक्सीजन लीकेज होने से संबंधित स्थान पर धमाका होने या आग लगने की संभावना बनी रहती है। लीकेज के बारे में सीएमएस से बात करके समाधान कराया जाएगा। अन्य स्थानों पर लगी ऑक्सीजन पाइप लाइन को भी चेक करवाया जाएगा।
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- डॉ. विनय कुमार सिंह, सीएमओ
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आज अवकाश पर हूं और ऑक्सीजन लीकेज की सूचना मिलने के बाद उसके बारे में संबंधित कंपनी के अधिकारी को बता दिया गया। साथ ही ऑक्सीजन प्लांट बंद करवा दिया है।
- डॉ. राजीव प्रसाद, सीएमएस जिला अस्पताल
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