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शौच के लिए खेत पर गई वृद्धा को सांड ने पटका, गई जान

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शौच के लिए खेत पर गई वृद्धा को सांड ने पटका, गई जान
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डिबाई। थाना क्षेत्र के गांव खुशालाबाद में शनिवार सुबह खेत पर शौच के लिए गई महिला पर सांड ने हमला कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई। शोर शराबा होने पर पहुंचे ग्रामीणों ने सांड को वहां से भगाकर महिला को अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। हादसे के बाद ग्रामीणों ने नाराजगी जताते हुए प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया।
थाना क्षेत्र के गांव खुशालाबाद निवासी चंपा देवी (78) शनिवार सुबह साढ़े पांच बजे अपने घर से शौच के लिए खेत पर गई थीं। बताया गया कि वह जैसे ही खेत पर पहुंची तो वहां घूम रहे एक सांड ने उन पर हमला कर दिया। साथ ही दो-तीन बार उठाकर जमीन पर पटका। जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गईं। चंपा देवी के शोर मचाने पर मौके पर अन्य ग्रामीण दौड़े। साथ ही सांड को वहां से भगाया। परिजन व ग्रामीण लहूलुहान अवस्था में चंपा देवी को सीएचसी लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। वृद्धा की मौत के बाद ग्रामीणों व परिजनों ने रोष जताया। साथ ही आरोप लगाया कि खेतों में घूम रहे पशुओं के लिए बनाए गए आश्रय स्थलों में पशुओं को नहीं छोड़ा जा रहा है, जिससे फसलों को नुकसान के अलावा ये पशु अब लोगों पर भी जानलेवा हमला कर रहे हैं।
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पहले भी हो चुके हैं हादसे
गत 23 अप्रैल की शाम को एक सांड औरंगाबाद थाने में घुस गया और एक उपनिरीक्षक पर जानलेवा हमला कर घायल कर दिया था। इसके अलावा गत दिनों पहासू थाना क्षेत्र में भी एक व्यक्ति की सांड के हमले में जान जा चुकी है। यही नहीं, सिकंदराबाद के मोहल्ला झारखंडी निवासी इरफान व उनके पुत्र सूफियान पर भी एक सांड ने हमला कर घायल कर दिया था। समाजसेवी भूप्रकाश बजाज, धर्मवीर सिंह, श्योदान सिंह ने छुट्टा गोवंशों को तत्काल आश्रय स्थल भिजवाने की मांग की है।
आवारा पशुओं को गोशाला भेजने का अभियान पड़ा सुस्त
जिले में गांव से देहात तक सड़कों पर गलियों व खेतों में आवारा पशु घूमते आम देखे जा सकते हैं। फसलों को सबसे अधिक नुकसान कर रहे हैं। वहीं, शासन के निर्देश पर विभाग की ओर से 100 दिन की कार्ययोजना के तहत आवारा पशुओं को गोशाला भेजने का अभियान भी सुस्त दिखाई दे रहा है।
शासन के निर्देश पर जिले में करीब पांच साल पहले 156 निराश्रित गोवंश आश्रय स्थल खोले गए। इनके संचालन के लिए अब तक करोड़ों रुपये की राशि खर्च हो चुकी है। शुरूआत में तो आवारा पशुओं खासकर गायों को ही आश्रय स्थल में भेजा गया। इस समय विभागीय आंकड़ों के अनुसार आश्रय स्थलों पर 17 हजार से अधिक गाय आदि बताए जा रहे हैं। वहीं, दूसरी ओर जिले भर में इससे कहीं अधिक आवारा पशु घूम रहे हैं। इनका आंकड़ा भी विभाग के पास नहीं है।
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मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अनिल कुमार सिंह ने बताया कि जिले से छुट्टा पशुओं को निजात दिलाने के लिए अभियान जारी है। इस अभियान के तहत जल्द ही आवारा पशुओं से निजात दिला दी जाएगी। यह अभियान शासन के निर्देश पर चल रहा है और इसके लिए बनाई गई टीम समय-समय पर पशुओं को पकड़कर गोशाला पहुंचा रही हैं।
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