पैर का इलाज कराने गए थे दिल्ली
यूपी के बुलंदशहर स्थित गांव तैयबपुर निवासी 60 वर्षीय अधिवक्ता एवं पूर्व प्रधान गजेंद्र सिंह पलावत अपने पैर का उपचार कराने दिल्ली गए हुए थे। गुरुवार की सुबह करीब आठ बजे दिल्ली के अस्पताल में उपचार के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। परिजनों को जैसे ही उनकी मौत की सूचना मिली, घर में मातम छा गया। सबसे ज्यादा सदमा उनकी पत्नी 58 वर्षीय कुसुम देवी को लगा। बताया जा रहा है कि कुसुम देवी करवाचौथ का व्रत रखने की तैयारी में थीं। पति दिल्ली में भर्ती थे, इसलिए वह चिंतित थीं। जैसे ही पति की मौत की खबर मिली, वह यह सदमा बर्दाश्त नहीं कर पाईं। अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। परिजन उन्हें उपचार के लिए मेरठ के अस्पताल ले गए। वहां उपचार के दौरान मौत हो गई।
12 घंटे भी नहीं रहा जुदाई का गम
पति की मौत के करीब 12 घंटे बाद ही बृहस्पतिवार रात करीब साढ़े आठ बजे कुसुम देवी ने भी दम तोड़ दिया। 12 घंटे के अंदर पति-पत्नी दोनों की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। घर में मातम पसर गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। त्योहार की खुशियां पलभर में मातम में बदल गईं। ग्रामीणों ने बताया कि गजेंद्र सिंह पलावत गांव के पूर्व प्रधान थे। पेशे से वह अधिवक्ता थे और गांव में उनकी अच्छी पकड़ थी। हर किसी के सुख-दुख में खड़े रहने वाले गजेंद्र की पत्नी कुसुम देवी भी बेहद मिलनसार और सरल स्वभाव की थीं। दोनों के बीच गहरा प्रेम था। गांव के बुजुर्ग कहते हैं कि दोनों को कभी लड़ते नहीं देखा। हमेशा एक-दूसरे का सम्मान करते थे। उनका रिश्ता पूरे गांव के लिए मिसाल था।
रात में पति और अगले दिन सुबह चली पत्नी की चिता, बेटे ने दी मुखाग्नि
गुरुवार रात को गजेंद्र सिंह पलावत का गांव में ही गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार किया गया। पूरा गांव उनके अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़ा। शुक्रवार की सुबह कुसुम देवी का अंतिम संस्कार पति की चिता के पास ही किया गया। 12 घंटे में पति पत्नी की चिताएं जलने पर वहां मौजूद हर शख्स फफक पड़ा। उनके इकलौते पुत्र वेद चौधरी ने माता-पिता को मुखाग्नि दी। बेटे के कंधों पर 12 घंटे में माता-पिता की अर्थी देख हर किसी की आंखें भर आईं। अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में ग्रामीण, रिश्तेदार और अधिवक्ता मौजूद रहे।