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दो सौ वर्ष पुराना मंदिर जहां पशुओं के स्वास्थ्य के लिए होती है पूजा

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चोला क्षेत्र में स्थित चामड़ वाला मंदिर। अमर उजाला - फोटो : SIKANDRABAD
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दो सौ वर्ष पुराना मंदिर जहां पशुओं के स्वास्थ्य के लिए होती है पूजा
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आपने मंदिर में अक्सर अपने, परिवार के लिए प्रार्थना, पूजा करने की बात सुनी होगी। मगर चोला क्षेत्र में एक मंदिर ऐसा भी जहां लोग अपने पशुओं के स्वास्थ्य के लिए भी पूजा करते हैं। और भगवान उनकी की मनोकामना पूरी करता हैं।
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क्षेत्र के गांव गांगरौल में गांव के बाहर जंगल में वर्षों पुराना चामड़ वाला मंदिर स्थित हैं। गांव व क्षेत्र के बुजुर्ग बताते हैं कि उक्त मंदिर करीब दो सौ साल पुराना है। मंदिर क्षेत्र के गांव के अलावा जनपद, अन्य प्रदेशों के हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ग्रामीणों ने बताया कि मंदिर पर प्रतिवर्ष होली दीपावली पर विशेष पूजा की होती है। इस अवसर पर मेले का भी आयोजन किया जाता है। होली, दीपावली पर होने वाली विशेष पूजा में क्षेत्र के गांव के अलावा, जनपद के अन्य हिस्सों दिल्ली, हरियाणा से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेते हैं, और देवी मां से अपनी मनोकामना पूरी कराने के लिए पूजा अर्चना करते हैं। वर्ष भर प्रत्येक सोमवार को मंदिर में क्षेत्र के लोग बड़ी संख्या में जल, दूध आदि चढ़ाने के लिए आते हैं। इस दिन विशेष पूजा भी होती है। बताया कि मंदिर में समय-समय पर भंडारे का भी आयोजन होता हैं। बताया गया कि मंदिर में एक स्तंभ है। मान्यता है कि स्तंभ पर मन्नत मानते हुए धागा बांधने पर उसकी मन्नत पूरी होती है। मंदिर में आने वाले श्रद्धालु बड़ी संख्या में स्तंभ पर धागा बांधकर अपनी मन्नतें मांगते हैं। मन्नत के पूरा होना पर वह धागे को खोलकर गरीबों को खाना खिलाते हैं। और उन्हें आर्थिक सहायता हेतु दान भी देते हैं। ग्रामीणों ने बताया कि मंदिर में क्षेत्र के लोग अपने पशुओं के स्वास्थ्य के लिए भी पूजा करते हैं। मान्यता है कि बच्चे को जन्म देने के बाद भैंस का दूध मंदिर में चढ़ाने पर भैंस को कष्टों से मुक्ति मिलती है। और उसका स्वास्थ्य ठीक रहता है।
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