आम की बादशाहत पर भी कोरोना का खतरा
बुलंदशहर। फलों के राजा आम की बादशाहत भी कोरोना संक्रमण की वजह से खतरे में है। इस बार अभी तक आम उत्पादकों को विदेश और देश के दूसरे राज्यों से एडवांस आर्डर नहीं मिले हैं। स्थानीय खरीदार भी आम के बाग की कीमत बीते सालों के मुकाबले कम लगा रहे हैं। रात्रि कर्फ्यू ने किसानों और व्यापारियों की चिंता और बढ़ा दी है। हालांकि इस बार बंपर उत्पादन की संभावनाएं हैं, लेकिन बाजार से डिमांड न आने की वजह से मुश्किलें बढ़ी हैं।
बीते वर्ष लॉकडाउन के चलते आम उत्पादकों को लाखों का नुकसान हुआ। तब अधिकतर आम शहर के बाहर नहीं पहुंच सका था। माल जहां गया वहां बॉर्डर पर रुक गया तो कहीं मंडी में बिक्री नहीं हुई। बाग खरीदने वाले भी उत्पादकों को पूरा पैसा नहीं चुका सके। जनपद की तहसील स्याना को फल पट्टी के नाम से जाना जाता है। यहां का दशहरी, चौसा और लंगड़ा आम मशहूर है। अधिकांश उत्पादक या बाग खरीदार आम को दिल्ली मंडी में ले जाते हैं। पिछले कुछ सालों में जयपुर, कोलकाता, राजस्थान और पंजाब से भीे डिमांड आती रही है।
दुबई तक है मांग
स्याना क्षेत्र में आम बागान किसानों के कुछ परिवार वाले सऊदी अरब और दुबई आदि कई देशों में रहकर नौकरी कर रहे हैं। वहां से आम की डिमांड आती रहती है। आम उत्पादक जगनेश और बिजेंद्र सिंह बताते हैं कि इन दिनों में आम का बाग खरीदने वाले व्यापारियों की लाइन लग जाती थी, जबकि इस बार संकट की स्थिति है।
आरिफ सईद, खान, बागान किसान बुगरासी = मेरे पास 60 बीघा आम की फसल है। गत वर्ष मैंने आम का सौदा 62 लाख रुपये में किया था। इसमें से आम खरीदने वाले व्यापारी के पास 17 लाख रुपये शेष रह गए थे। लॉकडाउन लगने के कारण व्यापारी ने नुकसान की बात कर शेष बची राशि में से 3.50 लाख रुपये ही दिए। इससे मुझे 13.5 लाख रुपये का नुकसान हुआ। अब फिर कोरोना संक्रमण बढ़ने से नुकसान की चिंता सताने लगी है।
दीपक सिरोही, बागान किसान, नंगला मदारीपुर = मेरे पास 70 बीघा आम का बाग है। गत वर्ष लॉकडाउन के चलते व्यापारी ने तीन लाख रुपये सस्ता खरीदा था। इसका कारण यह रहा कि आम मंडियों में नहीं बिका। अब एक बार फिर नुकसान की चिंता सताने लगी है। अभी तक किसी व्यापारी ने भी आम खरीदने के लिए संपर्क नहीं किया है।
बागान किसान सौजनारानी ललित भाटी = मेरे पास 65 बीघा बाग है। लॉकडाउन से पहले अच्छे दाम मिल जाते थे, लेकिन गत वर्ष 12 लाख रुपये का नुकसान उठाना पड़ा था। व्यापारी ने भी नुकसान की बात कर पूरे पैसे नहीं दिए। अब एक बार फिर रात्रि कर्फ्यू लगने लगा है और लॉकडाउन लगा तो फिर नुकसान झेलना पड़ेगा।
आम उत्पादन में खास है बुलंदशहर:
14 हजार हेक्टेयर में हैं जिले में आम के बाग।
2.5 लाख टन का उत्पादन बंपर बहार वाले साल में होता है।
80 फीसदी आम देश के दूसरे राज्यों और विदेश में भेजा जाता है।
20 प्रतिशत आम की खपत ही हो पाती है जिले में।