पैरोल खत्म, जेल में नहीं लौटे पांच कैदी
बुलंदशहर। कोविड-19 के कहर को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर शासन के निर्देश पर जिला कारागार से विभिन्न मामलों में सजायाफ्ता 49 कैदियों को पैरोल पर छोड़ दिया गया था। अब पैरोल का समय पूरा हो चुका है, लेकिन सिर्फ 42 कैदी ही वापस लौटे हैं, पांच अभी फरार हैं और दो की मृत्यु हो चुकी है।
गत 24 मार्च की देर रात कोविड-19 के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए देशभर में लॉकडाउन लगा दिया गया था। जिसके बाद कारागारों में भी कोरोना का संक्रमण बढ़ा तो सुप्रीम कोर्ट ने शासन को कारागारों से कुछ कैदी और बंदियों को निर्धारित और नियमानुसार पैरोल देने के आदेश दिए थे। जिसके बाद उत्तर प्रदेश शासन के निर्देश पर जिला न्यायालय से भी करीब 49 कैदियों को पैरोल देकर गत दो अप्रैल 2020 को छोड़ दिया गया था। लेकिन, इसके बाद जैसे-जैसे लॉकडाउन की अवधि बढ़ती गई, वैसे वैसे ही उक्त कैदियों की पैरोल भी बढ़ा दी गई थी। साथ ही अंत में अनलॉक लागू होने के बाद भी यह पैरोल बढ़ाई जाती रही। लेकिन, गत 14 नवंबर को पैरोल का अंतिम दिन था और उसके आगे पैरोल को बढ़ाया नहीं गया था। साथ ही सभी पैरोल पर छूटे दोषियों को जेल में वापस आने की चेतावनी दी गई थी। बताया गया कि सख्ती के बाद अब तक 42 कैदी वापस आ चुके हैं, जबकि दो कैदियों के मृत्यु सर्टिफिकेट जिला कारागार को उपलब्ध हुए हैं। जिससे स्पष्ट है कि उनकी मौत हो गई है। वहीं, पांच कैदी अभी भी वापस नहीं लौटे हैं। जबकि, पैरोल की अंतिम तिथि बीते हुए भी डेढ़ माह से अधिक का समय बीत चुका है।
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चार कैदी बुलंदशहर और एक दिल्ली का
पैरोल पर छूटने के बाद पांच कैदी पैरोल तिथि निकलने के बाद भी वापस नहीं लौटे हैं, उन्हें रिमाइंडर भी भेजे जा चुके हैं। इनमें से चार आरोपी बुलंदशहर जनपद के निवासी हैं और एक आरोपी दिल्ली का निवासी बताया जा रहा है। अब जिला कारागार प्रशासन बुलंदशहर एसएसपी और दिल्ली पुलिस कमिशभनर को आरोपियों को हाजिर कराने के लिए पत्राचार कर रहा है।
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325 बंदियों को भी न्यायालय से मिली थी पैरोल
जानकारी के अनुसार कैदियों के अलावा जिन लोगों के न्यायालय में मामले विचाराधीन हैं, ऐसे बंदियों को भी न्यायालय से पैरोल पर छोड़ दिया गया था। अब इनमें से अधिकतर विचाराधीन बंदी अपनी जमानत करा चुके हैं, जबकि कुछ कराने की जुगत में हैं। जिला कारागार प्रशासन का कहना है कि आरोपियों की पकड़ के लिए न्यायालय के अग्रिम आदेश का इंतजार किया जा रहा है।
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किसी वारदात को अंजाम न दे डालें फरार कैदी
पैरोल पर छूटने के बाद फरार चल रहे पांचों बदमाशों के न लौटने पर अफसरों के माथे पर भी चिंता की लकीरें खिंची हुई हैं। इस बात को भी नहीं नकारा जा सकता है कि आरोपी बाहर रहकर किसी वारदात को अंजाम नहीं देंगे। यदि, वह वारदात को अंजाम देते हैं तो उसका जिम्मेदार कौन होगा।
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49 कैदियों को पैरोल पर छोड़ा गया था। समयावधि नवंबर माह में खत्म हो चुकी है। इन सभी में से सिर्फ 42 कैदी ही वापस लौटे हैं, दो के मृत्यु प्रमाण पत्र परिजनों की ओर से दिए गए हैं। जबकि, अन्य चार बुलंदशहर के और एक आरोपी दिल्ली का है। जिनको पकड़ने के लिए एसएसपी बुलंदशहर और दिल्ली पुलिस कमिशभनर को पत्र भेजा जा रहा है। ओपी कटियार, जेल अधीक्षक