कलक्ट्रेट गेट के बाहर धरना पर बैठे भाकियू कार्यकर्ता।
- फोटो : BULANDSHAHR
किसानों की समस्याओं पर भड़की भाकियू, किया हंगामा
बुलंदशहर। किसानों की मांगों को लेकर भारतीय किसान यूनियन ने बुधवार को कलक्ट्रेट गेट पर घंटों हंगामा किया। इस दौरान पुलिस-प्रशासनिक अफसरों के साथ उनकी तीखी नोकझोंक भी हुई। कलक्ट्रेट गेट बंद होने पर कार्यकर्ता गेट पर चढ़ गए और वहां अपना झंडा टांगने की कोशिश की। इस दौरान एक उपनिरीक्षक के साथ उनकी नोकझोंक हुई। हालांकि, बाद में एडीएम, एआरटीओ और सिंचाई विभाग के अफसरों के आश्वासन पर किसान शांत हुए।
एनसीआर के मुख्य महासचिव मांगेराम त्यागी के नेतृत्व में भाकियू के पदाधिकारी-कार्यकर्ता और दर्जनों किसान कालाआम चौराहे से कलक्ट्रेट गेट पर प्रदर्शन करते हुए पहुंचे। उन्हें देखकर कलक्ट्रेट गेट पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने गेट बंद कर लिया और ताला लगा दिया। भाकियू पदाधिकारी और किसान गेट के बाहर ही दरी बिछाकर धरने पर बैठ गए। धरने में प्रदेश उपाध्यक्ष सतपाल सिंह ने कहा कि किसानों का गन्ने का भुगतान बकाया चल रहा है। दिवाली नजदीक है और अगर भुगतान नहीं हुआ तो किसान दिवाली कैसे मनाएंगे। कहा कि मक्का, धान की खरीद केंद्र समय से लगाए जाएं। धान मंडी में कम रेट पर लिया जा रहा है और अधिक रेट पर बेचा जा रहा है। एनसीआर के मुख्य महासचिव मांगेराम त्यागी ने कहा कि राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत के निर्देश पर प्रदेश भर में बुधवार को कलक्ट्रेट पर घेराव कर प्रदर्शन किया जा रहा है। जिससे कि किसानों की समस्याओं का जल्द से जल्द निवारण हो सके। उन्होंने कहा कि दिवाली से पहले किसानों के गन्ने का बकाया भुगतान होना चाहिए। गन्ने का भाव कम से कम 600 रुपये कुंतल होना चाहिए। ऊर्जा निगम किसानों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है। इससे किसान आत्महत्या करने को मजबूर हैं। किसानों के खिलाफ झूठी रिपोर्ट लिखवाई जा रही है। जो मीटर गांव देहात में लगे हुए हैं, उनमें गड़बड़ी चल रही है। जब सरकार ने 1868 रुपये धान का रेट तय कर दिया है, तो मंडी में उससे कम रेट में धान की खरीद क्यों हो रही है। वहीं, कम रेट पर धान खरीदकर महंगे दामों में बेचा जा रहा है। इस दौरान सीओ सिटी और नगर मजिस्ट्रेट मौके पर पहुंचे लेकिन भाकियू ने उनसे बात करने से स्पष्ट मना कर दिया। उनकी मांग थी कि आलाधिकारी मौके पर पहुंचे और आश्वासन दें। बाद में एडीएम वित्त एवं राजस्व मनोज कुमार सिंघल मौके पर पहुंचे और उनके आश्वासन के बाद मामला शांत हुआ और धरना समाप्त हुआ। इस अवसर पर यशवीर सिंह, सुशील शर्मा, गंगा प्रसाद पिपलानिया, दीपक चौधरी, विपिन चौधरी, अनुज चौधरी, जगदीश, पन्ना लाल आदि दर्जनों लोग मौजूद रहे।