फसलों पर टिड्डी का खतरा, बचाव के साथ अलर्ट हुआ विभाग
बुलंदशहर। पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में टिड्डी के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए शासन के निर्देश पर जिले में कृषि विभाग द्वारा अलर्ट जारी कर दिया गया है। टिड्डियों को नियंत्रित करने के लिए विभाग की ओर से एडवाइजरी भी जारी की गई है। वहीं, विभागीय अफसरों का कहना है कि टिड्डी तेज आवाज से डरकर भागती हैं। अगर कहीं, तेज आवाज में डीजे पर गाने बज रहे होते हैं तो वहां से तत्काल उड़ जाती हैं।
पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में किसानों की फसलों को चट करने वाले टिड्डी दलों का खतरा जिले पर मंडरा रहा है। जिससे किसानों को सचेत करने और फसलों को बचाने के लिए अनेक उपाय करने कृषि विभाग द्वारा शुरू कर दिए गए हैं। जिला कृषि रक्षा अधिकारी अमर पाल ने बताया कि पंजाब, हरियाणा और राजस्थान आदि राज्यों में टिड्डी दल के प्रकोप के कारण फसलें बर्बाद हो रही है। टिड्डी कीट झुंड में चलते है और इनकी चपेट में आई फसल पूरी तरह से बर्बाद हो जाती है। मादा कीट बड़े आकार की होती है, जो एक बार में 120 अंडे देती है। 20 दिनों में अंडे से बच्चे बाहर आ जाते हैं। बताया कि एक मादा कीट का जीवनकाल मात्र 12 सप्ताह का होता है। एक किमी के दायरे में इन कीटों की संख्या एक से डेढ़ करोड़ तक होती है। कृषि निदेशालय ने प्रदेश के किसानों को इसको लेकर अलर्ट जारी कर दिया है। किसानों को कहीं कहीं ऐसा प्रकोप नजर आएं तो इसकी जानकारी तुरंत प्रधान, लेखपाल, कृषि विभाग के अधिकारियों को दें। कृषि विभाग ने लखनऊ में कंट्रोल रूम बनाया है। किसान 055-2732063 पर कॉल कर जानकारी दे सकते हैं। वहीं, जिले के किसान जिला कृषि रक्षा अधिकारी के 9837918688 पर भी टिड्डी संबंधित शिकायत दर्ज करा सकते हैं। अफसरों का कहना है कि बसंत के मौसम में बलुई मिट्टी टिड्डी के प्रजनन एवं अंडे देने के लिए अनुकूल होती है। ऐसी मिट्टी वाले क्षेत्र में किसान जुताई कराकर जल का भराव करा दे तो खतरा कम हो जाएगा।
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ऐसे करें बचाव
कृषि विभाग के अफसरों का कहना है कि टिड्डी तेज आवाज से काफी डरते है, यदि टिड्डी आती दिखे तो तेज आवाज में गाने बजाने के साथ ही ढोल-नगाड़े बजाकर भी उनको भगाया जा सकता है। टिड्डी दल का प्रकोप होने पर किसान एकसाथ एकत्र होकर टीम के डिब्बों और थालियों को बजाएं। शोर मचाएं, इससे आसपास के खेतों में आक्रमण रूक जाएगा।
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इस तरह भी कर सकते है फसलों का बचाव
किसान सामूहिक रूप से क्लोरोपायरीफास 20 प्रतिशत, लैम्डासाएहैलोथ्रिन पांच प्रतिशत या क्लोरोपायरीफास 50 प्रतिशत और साइपर मैथ्रीन पांच प्रतिशत में से किसी एक दवा का फसल या पेड़ों पर छिड़काव करें। इसके अलावा टिड्डी कीट को नियंत्रित करने के लिए किसान खेतों के चारों ओर गड्ढों की खुदाई कर दें, टिड्डी कीट दल आकर उन गड्ढों में अंडा देगी, जिसको मिट्टी में दबाकर नष्ट किया जा सके। वहीं, चेताया कि टिड्डी दिन में खाती है और रात में अंडे देती है। अगर, यह प्रक्रिया सफल रही तो किसानों के लिए आफत हो सकती है।