एक अफसर की कार से हटाई जा रही नीली बत्ती
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प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के मना करने के बाद भी अफसर नीली बत्ती का मोह छोड़ नहीं पा रहे हैं। कई एसडीएम की गाड़ियों में अभी भी नीली बत्ती लगी हुई है। हालात यह है कि ऐसी गाड़ियां कलक्ट्रेट परिसर में ही खड़ी रहती हैं, लेकिन अफसर इससे अंजान हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार पद भार संभालते ही वीआइपी कल्चर खत्म करने का आदेश देशभर में जारी कर दिया था। इसमें कुछ को छोड़कर सभी को अपनी गाड़ियों में लाल और नीली बत्ती लगाने की मनाही थी। यहां तक कि हर मंत्री और विधायक की गाड़ियों में भी बत्ती कल्चर खत्म कर दिया गया। सिर्फ एंबुलेंस और पुलिस की गाड़ियों में ही बत्ती लगाने की अनुमति है। डीएम और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की गाड़ियों में इमरजेंसी के दौरान सिर्फ फ्लैश लाइट लगाने की ही अनुमति है। लेकिन इसके बाद भी पीसीएस अधिकारियों की गाड़ियों में नीली बत्ती लगी हुई है। इसका मतलब है कि पीसीएस अधिकारियों को पीएम और सीएम के आदेश की कोई परवाह ही नहीं है।
यहां तक कि पीसीएस अधिकारियों की नीली बत्ती लगी गाड़ियां कलक्ट्रेट परिसर में ही खड़ी रहती है। जिस पर सभी प्रशासनिक अधिकारियों की निगाह जाती है। लेकिन किसी भी अधिकारी ने शासन के आदेश को नहीं माना है। प्रशासनिक सूत्रों की माने तो यह नीली बत्ती लगी गाड़ियां कई सालों से चल रही है। इनका इस्तेमाल अधिकतर गाड़ी को रास्ता दिलाने के लिए किया जाता है। इसका कोई गलत इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। वहीं, कुछ अधिकारी भी नीली बत्ती गाड़ी में लगाना गलत मानते है।
एडीएम प्रशासन रवींद्र कुमार - शासन का आदेश है कि नीली बत्ती गाड़ियों में नहीं लगनी चाहिए। किसी विशेष परिस्थिति में ही सिर्फ लाइटें लगाई जा सकती हैं। शासन के आदेश का पूर्णतया पालन करना चाहिए। मामले की जांच कराई जाएगी।