यूपी में भयंकर ठंड होने के बावजूद अस्पतालों में रजाई तक नहीं, कहीं लटके ताले
बुलंदशहर। बर्फीली हवाएं और बूंदाबांदी से जहां सर्दी सितम ढा रही है। वहीं, सरकारी अस्पतालों में मरीजों को स्वास्थ्य सेवाएं लेने के लिए भटकना पड़ रहा है। अगर मरीज भर्ती भी हो रहा है तो चिकित्सालयों में मरीजों को ठंड से बचाने के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं है। जो कंबल दिए जा रहे हैं वह ठंड से बचाने में नाकाफी साबित हो रहे हैं। ऐसे में परेशान मरीजों को घर से कंबल और रजाई मंगवानी पड़ रही है। अस्पतालों में मरीजों के साथ रहने वाले तीमारदारों के लिए भी कोई इंतजाम नहीं हैं। वहीं, दूसरी ओर खानपुर क्षेत्र के अमरपुर स्थित स्वास्थ्य उपकेंद्र पर वर्षों से ताला लटका हुआ है। पांच साल पहले क्षेत्र के लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए लाखों की लागत से इस केंद्र का निर्माण कराया गया था, लेकिन डॉक्टर और स्टाफ के इंतजार में अब यह भवन जर्जर होने की कगार पर है।
जिला अस्पताल - मौसम लगातार रंगत बदल रहा है। गत 15 दिनों में जिले का न्यूनतम तापमान तीन डिग्री तक जा चुका है। साथ ही दो दिन पूर्व हुई बूंदाबांदी से हाड़ कंपा देने वाली ठंड फिर से लौट आई है। बढ़ती ठंड से सरकारी चिकित्सालयों में भर्ती प्रसूताओं और मरीजों को अनेक परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं। शासन द्वारा सर्दी से बचाव के लिए व्यवस्थाएं करने के निर्देश दिए जा चुके हैं, लेकिन मरीजों को नाममात्र सुविधाएं ही मिल रही हैं। जिला अस्पताल में करीब 100 मरीज प्रतिदिन भर्ती रहते हैं और इतने ही तीमारदार साथ रहते हैं। इनके लिए अस्पताल प्रशासन द्वारा मात्र एक कंबल दिया जाता है। मरीज और तीमारदार को सर्दी से बचाव करने के लिए घर से कंबल या रजाई मंगानी पड़ती है। जबकि मरीजों के पास लगने वाले हीटर पर भी कर्मचारियों और स्टाफ ने कब्जा कर रखा है। जिसे वह 24 घंटे अपने कक्ष में जलाए रहते हैं। 10 मरीजों पर मात्र एक हीटर दिया जाता है। वह भी समय-समय पर ही चलाया जाता है। जिला महिला अस्पताल में भी प्रतिदिन 100 से अधिक महिलाएं प्रसव के बाद भर्ती होती हैं। जिन्हें नवजात के साथ मात्र एक कंबल दिया जाता है। अधिकांश महिलाओं का कहना है कि अस्पताल से जो कंबल मिला है, उससे ठंड दूर नहीं होती है। रात को सर्दी से बचने के लिए घर से कंबल और रजाई मंगानी पड़ती है।
स्वास्थ्य उपकेंद्र अमरपुर - प्रदेश सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को स्वास्थ्य सेवा देने के लिए करीब पांच वर्ष पूर्व लाखों रुपये की लागत से स्वास्थ्य उपकेंद्र का निर्माण कराया गया था। उपकेंद्र का निर्माण होने के दौरान लोगों में आस जगी थी कि अब स्वास्थ्य सेवा लेने के लिए दूर-दराज नहीं जाना पड़ेगा। लेकिन उपकेंद्र का निर्माण होने के बाद शुभारंभ न होने पर भवन खंडहर में तब्दील होने लगा है। वहीं, अफसरों द्वारा संज्ञान में न लेने पर ग्रामीणों ने कब्जा करना शुरू कर दिया है और भवन में पशु बांधने के साथ उपले आदि रख रखे हैं। जिसे ग्रामीणों से निजात दिलाने के साथ उपकेंद्र को चालू करने के लिए कई बार स्वास्थ्य अफसरों को अवगत कराया जा चुका है, लेकिन स्वास्थ्य अफसर स्टाफ की कमी का रोना रोते हैं। इसके अलावा ग्राम थौना, औगना रहमतपुर व सौझना झांया आदि में भी ऐसे उपकेंद्र बने हैं जो जर्जर होने लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि ये भवन कृषि भूमि पर न बनते तो इसमें हजारों रुपये प्रतिवर्ष की फसल बोई जा सकती थी।
सभी सरकारी चिकित्सालयों में भर्ती मरीजों के लिए पर्याप्त कंबलों की व्यवस्था की गई है। अगर मरीज द्वारा अतिरिक्त कंबल की मांग की जाती है तो उसे दूसरा कंबल देने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा रूम हीटर आदि की भी व्यवस्था की गई है। अगर मरीज को सर्दी से बचाव के लिए हीटर आदि नहीं लगाए जा रहे हैं तो इसकी जांच कराई जाएगी। जिले में स्टाफ की कमी के बारे में कई बार शासन को पत्राचार किया जा चुका है। चिकित्सक और अन्य स्टाफ मिलने पर तैनाती दे दी जाएगी। - डॉ. केएन तिवारी, सीएमओ