कई मौतों का राज अब भी बिसरा जांच में ‘दफन’
बुलंदशहर। जनपद में गत छह माह के भीतर हुई विभिन्न संदिग्ध मौतों का राज अब भी बिसरा जांच में दफन है। मृतकों के परिजन अभी भी उनकी बिसरा रिपोर्ट आने का इंतजार कर रहे हैं। गत छह माह के जनपद के आंकड़े ही चौंकाने वाले हैं। हालांकि, जब से गाजियाबाद लैब को सैंपल जाने लगे हैं तब से रिपोर्ट जल्द ही व सुगमता से मिलना भी प्रारंभ हो गया है। आगरा लैब के मुकाबले गाजियाबाद नजदीक होने के कारण इसका लाभ मिल पा रहा है।
जनपद में गत छह माह के भीतर करीब 42 मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई थीं। इन सभी शव के बिसरा प्रिजर्व कर पुलिस ने जांच के लिए सैंपल विधि विज्ञान प्रयोगशाला गाजियाबाद को भेज दिए थे। यह तथ्य चौंकाने वाले हैं कि 42 में से सिर्फ दस शवों की बिसरा सैंपल की रिपोर्ट ही जांच के बाद पुलिस को प्राप्त हो सकी है। जबकि, जनपदभर के 32 मामले अब भी बिसरा रिपोर्ट आने का इंतजार कर रहे हैं। मृतकों के परिजन भी मौत की हकीकत जानने का दर-दर की ठोकरें खाते हैं, इसके बावजूद उनकी कहीं सुनवाई नहीं हो पा रही है। पुलिस जांच में अत्यधिक आवश्यकता पड़ने पर ही लैब को रिमाइंडर भेज कर बिसरा रिपोर्ट मंगाती है। अधिकतर मामलों में यह रिपोर्ट लैब की कार्यशाला में ही दबकर रह जाती है। यहीं, नहीं बता दें कि इसमें सबसे अधिक परेशानी पुलिस और वादी को दहेज हत्या के मामले में झेलनी पड़ती है। जिसमें हत्या का कारण स्पष्ट न होने तक पुलिस मामले में चार्जशीट नहीं लगा सकती है।
- पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण स्पष्ट न होने पर बिसरा सैंपल प्रिजर्व कर उसे जांच के लिए लैब भेज दिया जाता है। जहां से जांच के बाद रिपोर्ट के आधार पर अग्रिम जांच की जाती है। लेकिन, बिसरा जांच रिपोर्ट आने में काफी लंबा वक्त बीत जाता है, जिससे कि वादी और विवेचनाधिकारी को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कई बार रिमाइंडर भेजने पर भी महीनाें बाद जांच रिपोर्ट मिल पाती है। - संतोष कुमार सिंह, एसएसपी