किसानों ने सिंघाड़े की खेती को बनाया आमदनी का जरिया
अहमदगढ़। एक ओर जहां किसानों के लिए सरकार विभिन्न योजनाएं चलाकर उनकी आय दोगुनी करने का काम जारी रखे हुए है। वहीं, दूसरी ओर गांव अहमदगढ़ के किसानों ने परंपरागत खेती छोड़कर सिघाड़े की खेती को आमदनी का जरिया बना लिया है। किसानों का कहना है इस फसल से कम लागत में अधिक मुनाफा मिल जाता है। सिंघाड़े का रेट भी 20 से 25 रुपये प्रति किलो आसानी से मिल जाता है।
गांव अहमदगढ़ में सिंघाड़े की खेती करने वाले किसानों का कहना है कि वह इस खेती को पिछले एक दशक पहले से करते आ रहे हैं। इस फसल को अधिकतर नहर किनारे के गांव वाले किसान ही कर रहे हैं। जब से उन्होंने परंपरागत खेती को छोड़कर सिंघाड़े की खेती करनी शुरू की है, तब से उनकी आर्थिक स्थिति सुधरी है। अब उनकी देखादेखी में दूसरे किसान भी इस फसल में रुचि लेने लगे हैं। किसानों का कहना है कि धान, मक्का और अन्य फसलों को उगाने में अधिक खर्च आता है। जबकि सिंघाडे़ की खेती करने में एक बीघा में मात्र दो हजार रुपये की लागत आती है। सिंघाडे़ का दाम भी 20 से 25 रुपये प्रति किलो मिलने पर इस फसल से उन्हें 10 हजार से अधिक की प्रति बीघा आमदनी हो जाती है। जबकि दूसरी फसलों को उगाने के लिए इससे कम आमदनी होती है। सिंघाड़े की फसल करना किसानों के लिए फायदे का सौदा साबित हो रही है। इस फसल को आवारा गोवंश आदि से भी नुकसान नहीं है। इस क्षेत्र में गांव मऊ, ढकनगला, पापडी, दारापुर, सैदगढ़ी, मोरजपुर, मुरादपुर आदि गांवों के किसान भी सिघाड़े की खेती में रुचि लेने लगे हैं।
बोले किसान...
सिंघाड़े की फसल परंपरागत फसलों से कम लागत में पैदा हो जाती है। इसमें लागत और मेहनत दोनों ही कम होती है। आमदनी अच्छी होने के साथ किसान की आर्थिक दशा में सुधार होता है। - किसान जयंती कश्यप।
किसान सिंघाड़े की खेती करने से परहेज करते हैं, लेकिन इस खेती से किसान अधिक मुनाफा ले सकते हैं। इस खेती के लिए क्षेत्र से गुजर रही नहर भी किसानों को मददगार साबित हो रही है। किसान इस खेती को कर अधिक आमदनी कमा सकते हैं। - किसान संजय कश्यप।
अधिकतर किसान परंपरागत खेती को ही अहमियत देते हैं। जबकि किसानों को चाहिए कि वह दूसरी फसलों को भी अपनाकर अधिक मुनाफा कमा सकते हैं। सिंघाड़े की खेती करने में कम लागत आती है तो मुनाफा भी अधिक मिलता है। - अश्विनी कुमार सिंह, जिला कृषि अधिकारी, बुलंदशहर।