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1.15 करोड़ खर्च के बाद भी छुट्टा गोवंश से नहीं मिली निजात

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1.15 करोड़ खर्च के बाद भी छुट्टा गोवंश से नहीं मिली निजात
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बुलंदशहर। शासन से 1.15 करोड़ की राशि मिलने के बाद भी आवारा गोवंश से अभी निजात नहीं मिल सकी है। छुट्टा गोवंश जहां हादसों का सबब बन रहे हैं, वहीं, किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। अहार क्षेत्र में परेशान किसानों ने आश्रय स्थल बनवाने की मांग की है।
बता दें कि सरकार ने आवारा गोवंश से निजात दिलाने के लिए जनपद में 154 ग्राम पंचायतों और 17 निकाय क्षेत्रों में निराश्रित गोवंश आश्रय स्थल खोले हैं। इनमें करीब नौ हजार गोवंश भी पहुंच गए हैं। इनके संचालन के लिए पहले दो करोड़ से अधिक और उसके बाद फिर एक करोड़ से अधिक की राशि दी गई। अब पिछले कई दिन पहले सरकार ने गोवंश के लिए 1.15 करोड़ की राशि और स्वीकृत कर भेज दी है। बावजूद इसके अभी तक भी आवारा गोवंश से निजात नहीं मिल सकी है। जिस समय शासन ने गोवंश से जनता को लोगों को निजात दिलाने के लिए आश्रय केंद्र बनाने शुरू किए थे तो आदेश मिलने पर आवारा गोवंश को पकड़ने के लिए अभियान भी चलाया गया। उसके बाद जिम्मेदार अफसरों ने जगह-जगह घूम रहे आवारा गोवंश की ओर से मुंह फेर लिया। इसका नतीजा यह है कि वह लगातार लोगों पर हमला कर रहे हैं तो वह हादसों का भी सबब बन रहे हैं। इनके आतंक से सबसे अधिक परेशानी किसानोड्ड को है। क्योंकि उनकी फसल को चट करने में गोवंश कमी नहीं छोड़ रहे हैं। गांव अहार में निराश्रित गोवंश आश्रय स्थल बनाने की मांग की है। जिससे आवारा पशुओं से परेशानियों का सामना ना करना पड़े। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि खेतों में, सड़कों पर, स्कूलों के रास्तों में, मंदिरों के पास घूमते हुए आवारा गोवंशों से भारी दिक्कत हो रही है। अनेकों बार दुर्घटनाएं भी चुकी हैं। गांव मोहरसा के अलावा पौटा, खनौदा, चरौरा, बढ़पुरा आदि गांवों में भी भारी दिक्कत हो रही है। सबसे अधिक परेशान किसानों को है कि गोवंश उनकी फसल को नष्ट कर रहे हैं। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर यहां पर आश्रय स्थल बनवाकर निजात दिलाने की मांग की है।
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नहीं भा रही लोगों को गोवंश पालने की योजना
शासन ने पिछले दिनों आवारा गोवंश से निजात दिलाने के लिए एक और पहल की थी। इसके तहत निर्णय लिया था कि यदि कोई आवारा गोवंश को पालने की जिम्मेदारी लेता है तो उसे प्रति गोवंश पालने पर प्रति माह 900 रुपये की राशि दी जाएगी। इसके लिए शासन ने पहले चरण में करीब तीन हजार गोवंश पालने का लक्ष्य दिया था। जबकि यह योजना लोगों को नहीं भा रही है। विभागीय अधिकारी भी अभी तक गोवंश को पालने के लिए लोगों को चयनित करने में 50 के अंक का भी आंकड़ा पूरा नहीं कर पाए हैं।
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आवारा गोवंश से निजात दिलाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। गोवंश की बढ़ रही संख्या का एक कारण यह भी है लोग उन्हें लगातार छोड़ रहे हैं। जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए। यदि उन्हें गोवंश को छोड़ना है तो अपने क्षेत्र के आश्रय स्थल पर पहुंचकर छोड़ सकते हैं। गोवंश के पालन को लेकर लोगों को अपनी सोच भी बदलनी होगी।
- डॉ. लक्ष्मी नारायण, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी, बुलंदशहर।
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रात भर जाग कर किसान कर रहे पशुओं से रखवाली
-फसलों की सुरक्षा को लेकर परेशान हैं गांवों के लोग
-किसानों ने डीएम से शिकायत कर समस्या का समाधान कराने की मांग की
माई सिटी रिपोर्टर
अरनिया (खुर्जा)। प्रदेश सरकार की लाख कोशिशों के बाद भी आवारा पशुआें से किसानों को छुटकारा नहीं मिल पा रहा है। खेतों में पहुंचकर फसलों को बरबाद कर रहे आवारा पशु किसानों के लिए परेशानी का सबब बन गए हैं। आलम यह है कि फसलों की सुरक्षा के लिए किसानों को रात भर जाग कर खेतों पर रखवाली करनी पड़ रही है। किसानों का कहना है कि क्षेत्र की न्याय पंचायत जरारा में गोशाला निर्माण किया जाना था लेकिन आज तक नहीं हुआ।
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आवारा पशुओं के कारण किसानों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि शिकायत के बाद भी प्रशासन पशुआें के रोकथाम के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है। किसानों का कहना है कि जगह-जगह अस्थाई गोशालाएं बन गई हैं। लेकिन अरनियां ब्लॉक क्षेत्र की जरारा न्याय पंचायत में अभी तक एक भी गोशाला नहीं बन पाई है। इसके कारण मीरपुर, जरारा, पहाड़पुर, नागल आदि गांवों के खेतों में फसलों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। किसानों को फसलों की रखवाली के लिए रात भर जागरण करना पड़ रहा है। फसलों को बचाने के लिए किसानों ने खेतों के चारों ओर कटीले तार भी लगाए। लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। फसलों की रखवाली के दौरान कई किसान गोवंशों के हमले में घायल भी हो चुके हैं। ऐसे में किसानों की जान को भी खतरा है। पूर्व प्रधान नेपाल सिंह, प्रमोद कुमार, हरि सिंह, भानु प्रताप, रामवीर सिंह, कमल सिंह आदि किसानों ने डीएम से शिकायत कर गोशाला बनवाने की मांग की है।
बोले किसान
अवारा पशुओं से निजात नहीं मिल पा रहा है। अगर यही हाल रहा तो फसल का नुकसान झेलना पड़ेगा। अफसरों से शिकायत के बाद भी सुनवाई नहीं है। - महीलाल, किसान
आवारा पशुओं से फसलों को बचाने के लिए रात में कई बार खेतों पर जाना पड़ता है। ऐसे में हमेशा जान को खतरा बना रहता है। - अजय पाल, किसान
आवारा पशु मुसीबत बन गए हैं। रात में जागकर खेतों की रखवाली करनी पड़ रही है। फसलों को बचाने के लिए अब यही उपाय है। - खच्चर सिंह, किसान
अगर आवारा पशुओं के रहने के लिए गोशाला नहीं बनी तो फसलों का नुकसान झेलना पड़ेगा। प्रशासन को इसके लिए काम करना चाहिए। - सतवीर सिंह, किसान
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