अब डरो नहीं, साहस के साथ करो मुकाबला...
छतारी। क्षेत्र के रामानंद मंगलसेन महाविद्यालय में बृहस्पतिवार को अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स के तहत पुलिस की पाठशाला का आयोजन हुआ। इसमें सीओ डिबाई ने छात्राओं का मनोबल बढ़ाते हुए अब डरो नहीं, साहस के साथ करो मुकाबला का मंत्र दिया। इस दौरान 125 से अधिक छात्राओं ने भागीदारी कर अपनी सुरक्षा स्वयं करने की शपथ ली और पुलिस की मदद लेने में भी पीछे न रहने की बात कही।
सीओ डिबाई विक्रम सिंह ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि उनके अंदर के डर को निकालने और अबला से सबला बनाने की जो मुहिम अमर उजाला ने शुरू की है। वह काबिल-ए-तारीफ है। अब समाज बदला ही नहीं, बल्कि काफी जागरूक भी हो गया है। समाज में महिलाओं का सम्मान युगों-युगों से होता आया है। महिलाएं आज किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से कम ही नहीं, बल्कि कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ रही हैं। उन्हें अब डरने की जरूरत नहीं, बल्कि साहस से आगे बढ़ने की जरूरत है। पुलिस भी महिलाओं की सुरक्षा और उनके अधिकार दिलाने के लिए अनेक प्रयास कर रही है। इसलिए छात्राओं को चाहिए कि वह किसी भी अप्रिय घटना को नजरंदाज न करें और उसका डटकर विरोध करते हुए पहले परिजनों को बताएं। साथ ही पुलिस की मदद लें। किसी भी महिला या छात्रा द्वारा 1090 और 100 नंबर पर फोन करने पर उसे तुरंत पुलिस सहायता मिलती है। शिकायत करने वाली महिला को पूछताछ के लिए न तो थाने बुलाया जाता है और न ही उसका नाम सार्वजनिक किया जाता है। इसलिए छात्राओं को चाहिए कि वह पुलिस की मदद लेकर छेड़छाड़ आदि करने वाले शरारती तत्वों को सबक सिखाने के लिए आगे आएं। महाविद्यालय के सचिव मंगल सैन गुप्ता, एसएचओ छतारी योगेंद्र सिंह और प्रधानाचार्य एसएन शर्मा ने भी छात्राओं का मार्गदर्शन करते हुए हर मुसीबत का डटकर मुकाबला करने के लिए जागरूक किया।
--------
बोली छात्राएं...
जब जमाना बदल गया तो महिलाओं को भी बदलने की जरूरत है। जब तक महिलाओं की सोच नहीं बदलेगी तब तक वह अबला से सबला नहीं बन सकती है। इसके लिए शिक्षित होना भी जरूरी है।
-अंशू
------
मेरा मानना है कि जब तक महिलाएं अपनी आवाज बुलंद नहीं करेंगी, तब तक उनकी आवाज को दबाया जाता रहेगा। इसलिए पहले शिक्षा जरूरी है। साथ ही अपने अंदर का डर भी निकालना होगा।
- भारती
-------
जब भी कोई महिला या छात्रा घर से बाहर निकलती है तो उसे परिजन कहते हैं कि संभल कर जाना। उनकी इस बात को कई बार नजरंदाज कर दिया जाता है, जो सही नहीं है। परिजनों की बात को मानना चाहिए और घर से निकलने पर सजग भी रहना जरूरी है।
- गरिमा
-------
समाज में शिक्षा का दायरा बढ़ा है। हर मां-बाप की इच्छा होती है कि उनका बेटा या बेटी पढ़-लिखकर कुछ बने। इसलिए उनके इन अरमानों को पूरा करने के लिए अब जागरूक होना जरूरी हो गया है। साथ ही अंदर के डर को निकलना भी जरूरी हो गया है।
- पूजा।
-------
महिलाओं के लिए सरकार अनेक योजनाएं बना रही है। पुलिस भी उनकी मदद के लिए हर समय तैयार रहती है। ऐसे में महिलाओं को आगे आना चाहिए और सरकार की योजनाओं का लाभ उठाने के साथ पुलिस की मदद लेने में हिचक नहीं करनी चाहिए।
- प्रियांशी
--------
महिलाओं खासकर छात्राओं को जागरूक करने और उनके अधिकारों की जानकारी देने के लिए अमर उजाला की ओर से जो पहल शुरू की गई है। उसकी जितनी भी तारीफ की जाए कम है। ऐसी पुलिस की पाठशालाओं के आयोजन से छात्राओं में जागरूकता आएगी।
- शिल्पी