पंचग्राही योग में आज मनाई जाएगी देवोत्थान एकादशी
- योग निद्रा से जागंगे श्री हरि विष्णु, होगा तुलसी विवाह
- देवोत्थान एकादशी की होगी पूजा, सहलाग भी हो जाएंगे शुरू
संवाद न्यूज एजेंसी
बुलंदशहर। देवोत्थान एकादशी शुक्रवार को है। मान्यता के अनुसार इस दिन श्री हरि भगवान विष्णु जाग जाएंगे। इसके साथ ही मांगलिक कार्य भी शुरू होने के साथ शहनाई भी बजना शुरू हो जाएगी। एकादशी पंचग्राही योग में मनाई जाएगी। नवंबर से 26 फरवरी तक विवाह के लिए खूब शुभ मुहूर्त भी हैं। ऐसे में लोग शादियों की तैयारियों में जुटे हैं। नगर के तमाम बैंक्वेट हाल में शहनाई की धूम रहेगी।
पंडित नरेश कुमार शर्मा ने बताया कि पिछले काफी समय से हिंदू समाज में विवाह आदि शुभ कार्य रुके थे। अब चार नवंबर को देवोत्थान एकादशी है। इस दिन भगवान विष्णु चतुर्मास निद्रा से जाग जाएंगे। एकादशी पर घर-घर और मंदिरों में पूजा होगी। साथ ही तुलसी विवाह भी होगा। इसके लिए सभी ने अपनी-अपनी तैयारी कर ली है। जिसके बाद मांगलिक कार्य शुरू हो जाएंगे। इसी दिन से विवाह कार्य भी शुरू हो जाते हैं। देवोत्थान के दिन भी जिले में शादियों की धूम रहेगी। शुभ-मुहूर्त पर शादी करने के लिए परिजन पहले से ही शहर के बैंक्वेट हाल, गेस्ट हाउस, धर्मशाला, टेंट, लाइट, कैटरिंग, फूल माला, फोटोग्राफर को बुक कर चुके हैं। सहालग की दस्तक से बाजार में रौनक लौट आई है। लोग शादियों की तैयारियों में लगे हुए हैं। इस बार शादियों के शुभ मुहूर्त की कमी नहीं है।
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शादियों की शुभ मुहुर्त की तिथियां
नवंबर में 25, 26 और 28
दिसंबर में 2, 3, 4, 7, 8 और 9
जनवरी माह में 19, 25, 26, 27, 28, 30 और 31
फरवरी माह में 1, 6, 7, 8, 9, 10, 16, 17, 22 और 26
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भगवान विष्णु का करें पंचामृत से अभिषेक
पंडित नरेश कुमार शर्मा के अनुसार देवोत्थान एकादशी पर भगवान विष्णु का पंचामृत से अभिषेक करके विधि-विधान से पूजन करना चाहिए। उन्हें मिष्ठान, सिंघाड़ा, गन्ने का रस अर्पित करके शंख, घंटा-घड़ियाल बजाकर खुशी मनाना चाहिए। साथ ही भगवान शालिग्राम से तुलसी विवाह कराना चाहिए। तुलसी का शालिग्राम से विवाह कराने वाले भगवान विष्णु की कृपा के पात्र बनते हैं। जिन दंपतियों के कन्या नहीं हैं वे तुलसी को कन्यादान करके पुण्य अर्पित कर सकते हैं। एकादशी के दिन भगवान विष्णु की मूर्ति के सामने दीपक अवश्य जलाना चाहिए। भगवान विष्णु के नाम का कीर्तन भी करना चाहिए। निर्जल व्रत रखें। किसी गरीब और गाय को भोजन अवश्य कराना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि देवोत्थान एकादशी पर गोभी, पालक, शलजम और चावल का सेवन न करें। बाल और नाखून नहीं कटवाने चाहिए। किसी पेड़-पौधों की पत्तियां न तोड़े, भूल से भी किसी को कड़वी बातें न बोलें। दूसरे से मिले भोजन को ग्रहण न करें।