फसल अवशेष जलाया तो नहीं मिलेगा अनुदान व सम्मान निधि
बुलंदशहर। प्रदूषण को रोकने के लिए अब सख्ती बरती जाएगी। फसल अवशेष जलाने पर अब केवल जुर्माना ही नहीं लगेगा, बल्कि कृषि विभाग की योजनाओं से मिलने वाला सरकारी अनुदान के साथ प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का भी लाभ नहीं मिलेगा। इसके लिए उप कृषि निदेशक की ओर से निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
धान की फसल की कटाई के बाद पराली का निस्तारण किसानों के लिए एक समस्या रहती है। तमाम किसान इसे जलाकर छुटकारा पाना चाहते हैं। पराली जलाने पर रोक लगाने के लिए सरकार कठोर कदम उठा रही है। पहली बार फसल अवशेष जलाने पर जुर्माना का प्रावधान है। वहीं यदि कोई किसान तीन बार पराली जलाता है तो उसे मिलने वाले सभी सरकारी अनुदानों और मिलने वाली प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि पर रोक लगा दी जाएगी। किसानों को यूरिया, डीएपी, बीज समेत अन्य योजनाओं में मिलने वाला अनुदान का लाभ छिन जाएगा। यह जरूरी नहीं है कि किसान द्वारा फसल अवशेष जलाने की घटनाएं एक ही वर्ष की हों। इस बार जिले में अभी तक 14 फसल अवशेष यानी पराली जलाने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
उप कृषि निदेशक डिपिन कुमार का कहना है कि फसल अवशेष जलाने से प्रदूषण होता है। वहीं दूसरी ओर ऐसा करने पर भूमि की उर्वरा शक्ति कम हो जाती है। साथ ही भूमि के मित्रकीट भी नष्ट हो जाते हैं। फसल अवशेष में शामिल पराली और ईख की पत्तियों को किसान खेतों में ही मिला दें। साथ ही सिंचाई कर उस पर डी-कंपोजर और यूरिया का स्प्रे कर खाद के रूप में प्रयोग कर सकते हैं। फसल अवशेष में आग लगाने पर दिल्ली से सेटेलाइट के माध्यम से निगाह रखी जा रही है। वहां से सूचना मिलने पर विभागीय अधिकारी मौके पर पहुंचकर जांच करने के बाद आगामी कार्रवाई कर रहे हैं। उन्होंने किसानों से फसल अवशेष न जलाने का आह्वान किया है, ताकि प्रदूषण को बिगड़ने से बचाया जा सके।
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ये है जुर्माने का प्रावधान
- एक हेक्टेयर में फसल अवशेष जलाने पर 2500 रुपये का जुर्माना लगाने का प्रावधान है।
- दो से पांच हेक्टेयर में फसल अवशेष जलाने पर 5000 रुपये का जुर्माना लगाने का प्रावधान है।
- पांच हेक्टेयर से अधिक में फसल अवशेष जलाने पर 15000 रुपये का जुर्माना लगाने का प्रावधान है।