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उच्चस्तरीय जांच हुई तो कई नेताओं और अधिकारियों की फंसेगी गर्दन

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उच्चस्तरीय जांच हुई तो कई नेताओं और अधिकारियों की फंसेगी गर्दन
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बुलंदशहर। जिला पंचायत मॉल के निर्माण, दुकानों और फ्लैट के आवंटन की अगर उच्चस्तरीय जांच हुई तो कई नेताओं के साथ अधिकारियों की भी गर्दन फंस सकती है। तत्कालीन जिला पंचायत अध्यक्ष और सदस्यों पर भी अपने चहेतों के नाम दुकानों और फ्लैटों का आवंटन कराने का आरोप है। जिला पंचायत के तत्कालीन कुछ अधिकारियों पर भी मिलीभगत के आरोप लगाए गए थे।
वर्ष 2012 में जिला पंचायत ने 28.5 करोड़ रुपये की लागत से कालाआम चौराहे पर मॉल का निर्माण शुरू कराया था। निर्माण शुरू होते ही घोटाले के आरोप लगने लगे थे। आरोप था कि निर्माण का ठेका तत्कालीन जिला पंचायत अध्यक्ष के चहेते व्यक्ति की फर्म को दिया गया। इसी वजह से न तो टेंडर प्रकाशित किया गया और न ही टेंडर जारी करने के लिए अन्य मानकों का ध्यान रखा गया। इसके बाद विरोध करने वाले कई जिला पंचायत सदस्यों का मुंह बंद करने के लिए उनके चहेते और नजदीकियों को फ्लैट और दुकान आवंटित कर दिए गए। शिकायत होने पर तत्कालीन अधिकारियों ने जांच करते हुए क्लीन चिट दे दी थी। सदर विधायक प्रदीप चौधरी ने जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर रहते हुए भी शिकायत की थी। विधायक बनने के बाद विधानसभा में इस मुद्दे को उठाया। पिछले दिनों मुख्यमंत्री पोर्टल पर की गई शिकायत पर डीएम ने सीडीओ अभिषेक पांडेय को जांच सौंपी तो उन्होंने निर्माण और आवंटन में अनियमितता होने की रिपोर्ट देते हुए उच्च स्तरीय जांच की सिफारिश की।
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जांच में बार-बार मिलती रही क्लीन चिट
जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह और भाजपा नेता सुनील सिंह ने भी 2018 में मॉल निर्माण में घोटाले की शिकायत की थी। इसके अलावा 2019 में खुद प्रदीप चौधरी ने भी मॉल निर्माण में अनियमितता की शिकायत की। इसकी जांच प्राविधिक परीक्षक मेरठ ने की। उन्होंने जांच रिपोर्ट में आरोपों को खारिज कर दिया था। 2019 में एडीएम न्यायिक ने भी अपनी जांच में क्लीन चिट दी थी।
पिक्चर अभी बाकी है : विधायक
सदर विधायक प्रदीप चौधरी ने कहा कि अभी तो केवल ट्रेलर सामने आया है है। मॉल में घोटाले की पूरी पिक्चर अभी बाकी है। उन्होंने अंसारी रोड स्थित सराय कुंडीया की जमीन पर भी भ्रष्टाचार होने की बात कही। विधायक का कहना है कि उक्त जमीन को राज्य सरकार से जिला पंचायत ने किराये पर लिया था। वहां पर अपने कर्मचारियों के लिए आवास बनाए थे। इसके बाद भी जिला पंचायत अध्यक्ष और अपर मुख्य अधिकारी ने उक्त जमीन पर कब्जा होने से इनकार कर दिया।
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मेरे कार्यकाल में मॉल में किसी दुकान या फ्लैट का आवंटन नहीं हुआ है। विधायक प्रदीप चौधरी ने अध्यक्ष पद पर रहते हुए कुछ दुकानों और फ्लैट का आवंटन कराया था। मॉल निर्माण की अब तक दस बार शिकायत हुई है, लेकिन हर बार क्लीन चिट मिली है। यदि भ्रष्टाचार हुआ है तो कार्रवाई होनी चाहिए। इसकी जांच में पूरा सहयोग किया जाएगा। मॉल के आवंटियों का अहित किसी भी हाल में होने नहीं दिया जाएगा। मैं हमेशा आवंटियों के हित की लड़ाई लड़ूंगी।
- डॉ. अंतुल तेवतिया, अध्यक्ष, जिला पंचायत
शासन ने हमसे रिपोर्ट नहीं मांगी थी। आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत हुई थी। जांच की आख्या पोर्टल पर अपलोड कर दी गई है।
- सीपी सिंह, जिलाधिकारी
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