जिले में एक ओर जमीन की कमी से सरकारी योजनाएं दम तोड़ रही हैं, वहीं दूसरी ओर 30 हजार बीघा जमीन भू-माफियाओं के कब्जे में है। खासबात यह है कि सिस्टम जमीन को कब्जामुक्त कराने के बजाय भू-माफियाओं पर मेहरबान है। आलम यह है कि अफसर तीन माह में महज 152 हेक्टेयर भूमि को ही कब्जा मुक्त करा पाए हैं।
‘इंसाफ’ और ‘रोजगार’ पर भूमि की कमी ने ब्रेक लगा दिया है। जनपद न्यायाधीश ने डिबाई और स्याना में ग्राम न्यायालय और बुलंदशहर में जिला न्यायालय के लिए भूमि की डिमांड भेजी थी। तहसील अफसरों ने फाइल यह कहते हुए लौटा दी कि उनकी तहसील में खाली भूमि नहीं है।
आम आदमी को इंसाफ के लिए इंतजार न करना पड़े, इसलिए डिबाई और स्याना तहसील में ग्राम न्यायालय खुलने हैं। इसी क्रम में जिला न्यायाधीश ने डीएम से दोनों तहसील क्षेत्रों में एक एकड़ भूमि की डिमांड की थी। एसडीएम और तहसीलदारों ने जमीन उपलब्ध नहीं होने की बात कहकर फाइल जिला मुख्यालय को लौटा दी।
अफसरों की उदासीनता के चलते स्याना और डिबाई में ग्राम न्यायालय मूर्त रूप नहीं ले पाए। जिला न्यायालय के लिए भी 50 एकड़ भूमि मांगी गई। पीएनबी के निदेशक को बेरोजगार को रोजगार उपलब्ध कराने की मंशा से ट्रेनिंग सेंटर खुलवाना है।