ढाई हजार घरों में गोवंश बंधवाकर चारे के तीन करोड़ अटकाए
बुलंदशहर। बेहसहारा गोवंश सहभागिता योजना के तहत जिले में 2685 पशुओं को सहारा देने वाले लोगों को एक साल से चारे का पैसा नहीं दिया गया है। यह करीब तीन करोड़ की धनराशि है। पशुओं को सहारा देने वाले संकट में हैं और किसी तरह से चारे की व्यवस्था कर रहे हैं। दूसरी तरफ पशु चिकित्सा विभाग का दावा है कि शासन को पैसा रिलीज करने के लिए चिट्ठी लिखी गई है जिससे जल्द ही राहत मिलने की उम्मीद है।
जनपद में 154 आश्रय स्थल संचालित हैं, जहां पर 12 हजार से अधिक गोवंश रखे गए हैं। इसके बाद भी जब बेसहारा गोवंश से निजात नहीं मिली तो सरकार ने बेसहारा गोवंश सहभागिता योजना चलाई। इस योजना के तहत यदि कोई व्यक्ति गाय पालता है तो उसे प्रतिदिन के हिसाब से 30 रुपये, यानी एक माह में 900 रुपये चारे आदि के लिए देने की घोषणा की गई। इस योजना को लेकर जनपद में जिला प्रशासन की ओर जोर-शोर से अभियान चलाया गया। जिले में अभी तक 2685 लोग ही योजना के तहत गाय पाल रहे हैं। शुरुआत में तो कुछ दिन तक चारे की राशि लाभार्थियों को मिलती रही, लेकिन करीब एक साल से योजना के लाभार्थियों को चारे की राशि नहीं मिल सकी है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, योजना के लाभार्थियों की यह राशि करीब 2.90 करोड़ रुपये है। कई बार शासन और विभाग को पत्र भेजकर राशि की डिमांड की जा चुकी है। लेकिन अभी तक राशि प्राप्त नहीं हुई है।
जनपद भर में घूम रहे बेसहारा गोवंश
प्रदेश सरकार की बेसहारा गोवंश सहभागिता योजना जनपद के लोगों को नहीं भा रही है। बताया जा रहा है कि एक गाय को 30 रुपये प्रतिदिन के चारे में नहीं पाला जा सकता। इतनी राशि में गाय को भरपेट चारा भी नहीं मिल सकता। गाय को सिर्फ चारा ही नहीं, अपितु उसके साथ खल आदि की भी जरूरत होती है। तभी वह स्वस्थ रहेगी और दूध भी देगी। वहीं, दूसरी ओर जनपद में 154 निराश्रित गोवंश आश्रय खुलने के बाद भी हजारों बेसहारा गोवंश घूम रहे हैं। इन्हें शहर से लेकर गांवों और खेतों में फसलों को नष्ट करते आम देखा जा सकता है। इन्हें गोशाला भिजवाने की भी कभी जिम्मेदार अफसरों ने जहमत नहीं उठाई है।
बेसहारा गोवंश सहभागिता योजना का लाभ अधिक से अधिक लोगों को देने का प्रयास किया जा रहा है। एक साल से योजना के तहत लाभार्थियों को राशि नहीं मिली है। राशि की डिमांड की गई है और जल्द मिलने की संभावना है। राशि मिलते ही लाभार्थियों के खाते में डाल दी जाएगी।
- डॉ. विजेंद्र सिंह, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी