कर्मचारी विरोधी नीतियों को लेकर मंगलवार को जिले की सभी सरकारी बैंक शाखाओं में कामकाज ठप रहा। हड़ताल के चलते बैंकों में 250 करोड़ रुपये का लेनदेन प्रभावित हुआ। बैंक बंदी का सरकारी खजाने पर आंशिक रूप से असर पड़ा।
सात सूत्रीय मांगों को लेकर यूएफबीयू के बैनर तले सरकारी बैंकों के कर्मचारी मंगलवार को हड़ताल पर चले गए। नतीजतन एक भी सरकारी बैंक शाखा में लेनदेन नहीं हो सका। कर्मचारियों के हड़ताल पर चले जाने से सबसे अधिक परेशानी बैंक ग्राहकों को हुई। बैंक बंदी का असर रजिस्ट्री कार्यालय, कचहरी, सरकारी रिवेन्यू पर भी दिखाई पड़ा।
सिविल लाइन पीएनबी, यमुना पुरम पीएनबी वर्किंग ऑवर्स में ग्राहकों का जमघट लगा रहता था, वहां इक्का दुक्का ग्राहक पहुंच पाए। जो ग्राहक ट्रांजक्शन की उम्मीद से बैंको में पहुंचे उनको मायूसी हाथ लगी।
बुलंदशहर खुर्जा, सिकंदराबाद, अनूपशहर, जहांगीराबाद, शिकारपुर, डिबाई, दानपुर, गुलावठी, लखावटी, औरंगाबाद, स्याना, बीबीनगर, ऊंचागांव आदि क्षेत्रों में बैंकों में कामकाज नहीं होने से ग्राहकों को मुश्किल का सामना करना पड़ा।
कर्मचारी बैंकों के निजीकरण का विरोध, बैंकों के विलय का विरोध, नोट बंदी के दौरान काम करने वाले कर्मचारियों को अतिरिक्त भुगतान, सभी संवर्गों मे समान रुप से कर्मचारियों की भर्तियां, ठेकेदार प्रथा को बंद करने, लोन डिफाल्टर्स के खिलाफ अपराधिक कार्रवाई कराने की मांग कर रहे हैं।