बिहार के तिवारी चकिया गांव में किसान परिवार में जन्मे मनीष तिवारी को पेड़ों से ऐसा प्रेम हुआ है कि वह अब हरियाली के प्रति ही समर्पित हो गए हैं। पौधे लगाने से लेकर पेड़ बनने तक पोषण करना उनका कर्म और धर्म बन गया है। अविवाहित जीवन जीकर पर्यावरण व जलवायु को शुद्ध बनाने का वीणा उठाकर चल पड़े हैं।
उनका मकसद अधिक से अधिक संख्या में पौधे लगाकर उनको पेड़ बनने तक पालना और लोगों को इसके लिए प्रेरित करना है। इसके चलते लोग उन्हें बाबा वृक्षदेव के नाम से पुकारते हैं। बाबा वृक्षदेव बिहार के जनपद गोपालगंज के तिवारी चकिया गांव में किसान परिवार से हैं। माता पिता की मौत के बाद से वह पेड़ों के लिए समर्पित हो गये।
1996 में उन्होंने घर छोड़ दिया और लखनऊ आकर नगर में पौंधे लगाने के काम में जुट गये। उन्होंने राजधानी स्थित नाका हिनडोला क्षेत्र में आबादी के बीच बदबू का कारण बनें तालाब को साफ कराकर वृक्षारोपण कराया। वह क्षेत्र अब हराभरा हो गया है। उनका कहना है कि पौधा लगाना सांस लेने जितना जरूरी है।
पौधा लगाने से ज्यादा महत्वपूर्ण है उसे पालकर पेड़ बनाना है। उनका कहना है कि सरकार ने पौधे तो लगवाए लेकिन उनके रख रखाव, खाद, पानी देने आदि की व्यवस्था नहीं की। सही पालन पोषण के बिना आधे से अधिक पौधे मर गये हैं। ऐसे में पौधे लगवाकर विश्व रिकार्ड बनाने का क्या फायदा।
उनका कहना है कि पौधा जितने लगाओ उन्हें पालो और पेड़ बनाओ, तभी इस मिशन का लाभ मिलेगा। पेड़ों में हमारा जीवन बसता है। बाबा अब तक लाखों पेड़ लगवाकर पाल चुके हैं।
बाबा वृक्षदेव ने शिकारपुर स्थित सीओ कार्यालय परिसर में पौधा लगाकर पेड़ बनाने का जिम्मा अपने कंधों पर लिया है।
बाबा ने होली के दिन परिसर में पौधा लगाने की शुरुआत की है। पौधा रोपने से लेकर, मिटटी में खाद और पानी देने का काम बाबा ने स्वयं किया। वह परिसर में अब तक 50 से अधिक पौधे लगा चुके हैं।