अनूपशहर। बार एसोसिएशन के छह जनवरी को होने वाले चुनाव को लेकर कचहरी परिसर में सियासी पारा चढ़ गया है। चुनाव में इस बार अधिवक्ताओं की बुनियादी समस्याओं और बार के विकास के मुद्दों के बजाय जातीय समीकरणों का गुणा-भाग हावी होता दिखाई दे रहा है। प्रत्याशी मतदाताओं के बीच जाकर जनसंपर्क करने के बजाय सामान्य, पिछड़ा, दलित और मुस्लिम वोटों की जोड़-तोड़ में व्यस्त हैं।
कचहरी परिसर में पेयजल, शौचालय की कमी और कच्ची सड़कों जैसी गंभीर समस्याएं वर्षों से जस की तस बनी हुई हैं। नवीन कोर्ट परिसर में हल्की बारिश होते ही जलभराव की समस्या विकराल हो जाती है, जिससे अधिवक्ताओं और वादकारियों का निकलना दूभर हो जाता है। इन मुद्दों पर बात करने के बजाय प्रत्याशी मतदाताओं को लुभाने के लिए दावतों का सहारा ले रहे हैं। चैंबरों में चुनावी चर्चा जोरों पर है, जहां विकास से ज्यादा जातियों के आंकड़ों पर मंथन हो रहा है।
अधिवक्ताओं की मांग है कि जो चैंबर दिलाएगा, वही वोट पाएगा। आकिब गाजी, दीनानाथ, गोपाल गोयल और वरुण सक्सेना सहित कई अधिवक्ताओं का कहना है कि वे उसी प्रत्याशी को चुनेंगे जो पक्के चैंबरों का निर्माण कराएगा। साथ ही अधिवक्ताओं की मांग है कि जहांगीराबाद थाने को अनूपशहर कोर्ट में शामिल किया जाए।
सिविल जज सीनियर डिवीजन की स्थापना की जाए। गरीबों को सुलभ न्याय और बार का चहुंमुखी विकास हो। कहा कि नारों और वादों के बजाय अब ठोस काम की जरूरत है। अब देखना यह होगा कि 6 जनवरी को मतदाता जातीय समीकरणों को चुनते हैं या अपने हक की लड़ाई लड़ने वाले प्रत्याशी को।