एसएसपी दफ्तर में नगर कोतवाल से नोंकझोंक करते अधिवक्ता। संवाद
बुलंदशहर। अधिवक्ता को थर्ड डिग्री देने और हथकड़ी लगाकर सिटी मजिस्ट्रेट के यहां लाने के मामले को लेकर अधिवक्ता दूसरे दिन यानि बृहस्पतिवार को भी उग्र नजर आए। बुधवार को देर रात तक चले हाई-वोल्टेज हंगामे के बाद बृहस्पतिवार को फिर से अधिवक्ता कार्रवाई न होने पर पुलिस दफ्तर पहुंच गए, जहां एसपी देहात के कार्यालय पहुंच कर नाराजगी जताते हुए संबंधित पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई करने और कोतवाल को हटाए जाने की मांग की। इस दौरान मौके पर पहुंचे नगर कोतवाल का घेराव कर जमकर नोकझोंक हुई।
जिला बार एसोसिएशन के बुधवार को ही नवनिर्वाचित हुए अध्यक्ष रविंद्र शर्मा और सचिव उमेश कौशिक के साथ लगभग सौ अधिवक्ता पुलिस कार्यालय पहुंचे। यहां एसपी देहात के कार्यालय के बाहर पुलिस प्रशासन मुर्दाबाद के नारे लगाए। अधिवक्ताओं ने बताया कि मंगलवार शाम चैंबर से काम समाप्त कर अधिवक्ता नरेश प्रताप सिंह घर जा रहे थे। काला आम चौराहा पर चेकिंग के दौरान दरोगा और कांस्टेबल ने नरेश प्रताप सिंह के साथ अभद्रता की और विरोध करने पर मारपीट की।
इसके बाद कोतवाली ले जाकर कोतवाल, दारोगा और सिपाही ने अधिवक्ता को बुरी तरह से पीटा। इस दौरान उनकी अधिवक्ता वाली ड्रेस से भी छेड़छाड़ की गई। रात में अधिवक्ता कोतवाली पहुंचे तो नरेश प्रताप सिंह से मिलने नहीं दिया गया। इसके बाद बुधवार की शाम शांति भंग में चालान कर हथकड़ी लगाकर सिटी मजिस्ट्रेट कोर्ट ले जाया गया। इसके बाद अधिवक्ताओं ने पुलिस कार्यालय के बाहर जाम लगाया और देर रात में कार्रवाई का आश्वासन मिलने के बाद अधिवक्ता सड़क से हटे। लेकिन, बृहस्पतिवार सुबह तक भी अधिवक्ताओं के शिकायत करने पर भी दोषी पुलिसकर्मियों पर अधिकारियों ने कार्रवाई नहीं की है। अधिवक्ताओं के पहुंचने के कुछ देर बाद ही कोतवाली प्रभारी अनिल कुमार शाही फोर्स के साथ पहुंचे।
यहां कोतवाल के सामने ही अधिवक्ताओं ने पुलिस और कोतवाल मुर्दाबाद के नारे लगाए गए। अधिवक्ताओं ने कोतवाल को बर्खास्त करने और दोषी सभी पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की। अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी है कि कार्रवाई न होने तक आंदोलन जारी रहेगा। जिस समय अधिवक्ता पुलिस आफिस पहुंचे एसएसपी मेरठ मीटिंग में गए हुए थे, इसलिए एसपी देहात रोहित मिश्रा से शिकायत करते हुए अधिवक्ताओं ने ज्ञापन दिया। एसपी देहात ने जांच कर कार्रवाई कराने का आश्वासन दिया।
कुकरा में वन कर्मियों को बाघ के पगचिन्ह दिखाते ग्रामीण। स्त्रोत-ग्रामीण।