सीएम योगी आदित्यनाथ के साथ भाजपा विधायक प्रदीप चौधरी
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एमपी-एमएलए कोर्ट से पांच बार एनबीडब्ल्यू जारी होने और फरार की उद्घोषणा के बावजूद सदर विधायक प्रदीप चौधरी बीते दिनों शिकारपुर में मुख्यमंत्री की जनसभा में शामिल हो गए। जबकि, कोर्ट ने साफ निर्देश दिए थे कि वह यदि किसी भी जनसभा या रैली में शामिल होते हैं तो संबंधित थाना पुलिस एसएसपी और नगर कोतवाल को जानकारी देगी। जिससे उनके एनबीडब्ल्यू तामिल कराकर कोर्ट की कार्रवाई पूरी की जा सके। अब न्यायालय ने नाराजगी जताते हुए इस एसएसपी और नगर व शिकारपुर पुलिस की लापरवाही बताया है। साथ ही दोनों कोतवाल को नोटिस जारी किया गया है।
भाजपा विधायक प्रदीप चौधरी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। फरार भाजपा विधायक प्रदीप चौधरी के खिलाफ एमपी-एमएलए कोर्ट अनूपशहर द्वारा पांच बार एनबीडब्ल्यू जारी किए जा चुके हैं। इसी के चलते बीते दिनों न्यायालय द्वारा डीएम व राज्य चुनाव आयुक्त को पत्र जारी करते हुए अभियुक्त प्रदीप चौधरी पर चुनावी सभा या सार्वजनिक सभा या चुनाव प्रचार करते हुए पाए जाने पर एसएसपी व थाना प्रभारी नगर को अवगत कराने के लिए कहा गया था। जिससे न्यायालय के आदेश का अनुपालन हो सके। इसके बावजूद भी भाजपा विधायक द्वारा 19 अप्रैल को शिकारपुर कोतवाली क्षेत्र में आयोजित हुई मुख्यमंत्री की चुनावी सभा में प्रतिभाग किया गया। जिस पर कोर्ट ने इसे अपने आदेशों की अवहेलना मानना है।
साथ ही इस पर सख्त रूप अपनाते हुए टिप्पणी करते हुए कहा कि एसएसपी व स्थानीय अधिकारियों का आचरण न्यायालय के आदेशों की आवेहलना है। कोर्ट ने पुलिस की लापरवाही का संज्ञान लेते हुए कोतवाली प्रभारी शिकारपुर और कोतवाली प्रभारी नगर के खिलाफ दांडिक वाद का नोटिस जारी किया है। इसके साथ ही कोर्ट ने 30 अप्रैल को शिकारपुर कोतवाली प्रभारी और नगर कोतवाली प्रभारी को व्यक्तिगत रूप से तलब किया है।
वादी वीरेंद्र सिंह के अधिवक्ता राकेश वर्मा ने एमपी-एमएलए कोर्ट के न्यायाधीश विनय कुमार सिंह चतुर्थ के न्यायालय से आचार संहिता के खत्म होने के बाद विधानसभा अध्यक्ष को पत्र भेज भाजपा विधायक की विधानसभा सदस्यता रद्द किए जाने का अनुरोध किया है।