बुलदंशहर। 15 दिन पहले लगे इंजेक्शन से मंगलवार शाम महिला की मौत होने का आरोप लगा ग्रामीणों ने भूड़ रोड स्थित निजी अस्पताल के सामने हंगामा किया। लोगों ने डॉक्टर पर गलत इजेंक्शन लगाने का आरोप लगा मुआवजे की मांग की। मंगलवार देर शाम सूजापुर धमेड़ा के लोग सुधीर क्लीनिक के सामने पहुंच गए।
गांव के प्रेम सिंह ने बताया कि भतीजे इंद्रपाल की पत्नी माला को 22 जून को पेट में दर्द हुआ। रात को सुधीर क्लीनिक लाए। यहां इंजेक्शन लगाया, जिसकी वजह से शरीर पर छाले पड़ गए। आरोप है कि डॉक्टर ने मेरठ रेफर कर दिया। मेरठ के निजी क्लीनिक में 14 दिन तक इलाज चला। फिर दिल्ली रेफर कर दिया। वहां अस्पताल में मंगलवार को मौत हो गई। प्रेम सिंह का आरोप है कि डॉक्टर के गलत इंजेक्शन की वजह से मौत हुई है। उधर पूर्व मंत्री किरनपाल लोगों को समझाते हुए नजर आए। क्लीनिक संचालक डॉ सुधीर ने बताया कि लोग गलत आरोप लगाकर मुआवजे की मांग कर रहे हैं।
पैसे नहीं देने पर अस्पताल में बंधक बनाया
बुलंदशहर। घर में पड़ा बेटे का शव, अस्पताल में 50 हजार न देने पर बंधक बने देवर और भाई। महिला ने बैंक से एफडी तुड़वाकर 50 हजार रुपये का इंतजाम करवाकर देवर और भाई को छुड़वाया। तब जाकर बेटे का अंतिम संस्कार सोमवार देर शाम हो सका। महिला ने अस्पताल संचालक पर आरोप लगाकर डीएम और एसएसपी से शिकायत की है। बंगाल निवासी शिखाकर आवास विकास प्रथम में रहती हैं। शिखाकर बेटे मानषकर (29) के साथ रहती थीं। शिखाकर ने मानसिक रूप से बीमार बेटे को मेरठ-हापुड़ रोड स्थित ग्रीन सुपर स्पेशलिटी एंड ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया। डॉक्टरों ने इलाज के नाम पर 2.40 लाख रुपये लिये। छह जुलाई को सुबह साढ़े 11 बजे बेटे की मौत हो गई। डॉक्टरों ने हमसे ट्रीटमेंट के 50 हजार रुपये और मांगे। रुपये न देने की स्थिति में देवर और भाई को बंधक बनाने की शर्त रखी। ग्रीन सुपर स्पेशलिटी एंड ट्रामा सेंटर के मैनेजिंग डायरेक्टर मो. गुलजार का कहना है कि21 हजार रुपये शिखाकर के परिवार ने मुझे दिए थे। 22 हजार रुपये दवा के लिए अलग दिये। हां, रविवार को 50 हजार रुपये अलग दिए। सभी आरोप गलत हैं।