खुर्जा जंक्शन। भादवा गांव में बृहस्पतिवार को पुराने कुएं से ईंट निकालते समय ढांग ढहने से एक मजदूर की दबकर मौत हो गई, जबकि एक मजदूर को बचा लिया गया। दो घंटे ग्रामीणों और तीन घंटे जेसीबी की खुदाई के बाद शव को 35 फीट गहरे कुएं से बाहर निकाला जा सका। भादवा गांव में बृज कुमार के खेत में वर्षों पुराना कुआं है। बृहस्पतिवार को ब्रज कुमार ने पप्पू, रविंदर, तोताराम, जसवीर को कुएं के अंदर से ईंट निकालने के लिए लगाया था। जसवीर ने बताया कि बृहस्पतिवार सुबह 10 बजे उसका चचेरा भाई पप्पू कुएं में 35 फीट नीचे से ईंट भर रहा था और बाकी के मजदूर ईंट खींच रहे थे। इसी दौरान अचानक मिट्टी की ढांग कुएं में भरभरा कर गिर गई। पप्पू ढांग में दब गया, जबकि तोताराम को कुएं में फिसलने से बचा लिया गया। ग्रामीणों ने पप्पू को कुएं से बाहर निकालने के लिए खुदाई शुरू कर दी और प्रशासन को सूचित किया। करीब दो घंटे बाद दोपहर 12 बजे जेसीबी मशीन वहां पहुंची और खुदाई शुरू की, लेकिन गहराई अधिक होने के कारण जेसीबी जवाब दे गई। 1.15 बजे जेसीबी के खाली हाथ पहुंचे पर एसडीएम डीपी सिंह और सीओ श्रीप्रकाश द्विवेदी ने उसी जेसीबी से दोबारा खुदाई कराई। दोपहर 2.50 बजे पप्पू का शव निकाला लिया गया। एंबुलेंस से मजदूर को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना से गांव में कोहराम मचा हुआ है।
ग्रामीण और परिजन करते रहे दुआ
कुएं की ढांग में मजदूर पप्पू के दबने से लेकर शव निकाले जाने तक ग्रामीण और
परिजन भगवान के चमत्कार की आस लगाए रहे और पप्पू के जिंदा बचने के लिए बराबर दुआ करते रहे, लेकिन
उनकी प्रार्थना ईश्वर ने अनसुनी कर दी। जैसे ही शव निकला ग्रामीणों और परिजनों में चीख-पुकार मच गई।
पुलिस-प्रशासन ने दिखाई लापरवाही
ग्रामीणों का आरोप है कि कुएं से मजदूर को निकालने के लिए प्रशासन ने लापरवाही की। मौके पर लेखपाल, पुलिस, जेसीबी 12 बजे पहुंचे। 1.15 बजे पहुंचे एसडीएम डीपी सिंह और सीओ श्रीप्रकाश द्विवेदी बड़ी जेसीबी मंगाने का दावा किया, लेकिन बड़ी जेसीबी नहीं पहुंची। वहीं पुलिस शव निकलवाने की बजाए ग्रामीणों को खदेड़ने में लगी रही। यदि समय पर खुदाई कराई जाती मजदूर की जान बच सकती थी।
शव लेकर गांव से भागे अधिकारी
भादवा गांव में 2:50 बजे जैसे ही शव 35 फीट गहरे कुएं से निकाला गया, डॉक्टर शव टाटा सूमो में लाद कर रवाना हो गए। ग्रामीणों का आरोप है कि मजदूर की पहले ही मौत हो चुकी थी, लेकिन प्रशासन इस बात को छुपा रहा था, ताकि ग्रामीण प्रशासन की लापरवाही पर बवाल न कर दें।