प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों पर रात-दिन चलेगी छापेमारी
बुलंदशहर। सुप्रीम कोर्ट के आदेश और शासन के निर्देश के बाद अधिकारियों को गंगा स्वच्छता की याद आ गई है। शासन का निर्देश पहुंचते ही अफसरों में हड़कंप मच गया। कंट्रोल कमेटी की बैठक में टास्क फोर्स का गठन किया गया है। कुंभ स्नान होने तक गंगा में कारखानों का पानी नहीं डलेगा। गंगा में प्रदूषण फैलाने वाले प्रदेश के 19 जनपदों में बुलंदशहर भी महत्वपूर्ण है। यहां पर स्याना, डिबाई और अनूपशहर तहसील क्षेत्रों में गंगा में प्रदूषण फैलाया जाता है। इन तहसील क्षेत्रों में कई औद्योगिक इकाइयां हैं। इनका अवशिष्ट जल गंगा में डाला जाता है। स्याना तहसील क्षेत्र में तो हापुड़ जनपद की फैक्ट्रियों का पानी भी डाला जाता है।
जिले को दी क्लीन चिट
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी इंजीनियर एके आनंद के अनुसार डिस्टलरी, पेपर मिल और चमड़े की इकाइयों से ज्यादा प्रदूषण फैलता है। जिले में ऐसी ज्यादा इकाई नहीं हैं। हापुड़ जिले से जरूर प्रदूषण फैलता है। हालांकि अफसरों का दावा है कि ये इकाइयां पानी को शुद्ध करके ही गंगा में डाल रही हैं।
बुलंदशहर की फैक्ट्रियों के पानी की भी जांच
गढ़मुक्तेश्वर। एसडीएम केबी सिंह ने बताया कि धौलाना स्थित दुग्ध प्लांट, स्याना स्थित दुग्ध प्लांट, बहादुरगढ़ स्थित चीज प्लांट और सिंभावली शराब फैक्ट्री का पानी अलग-अलग नालों में गिरने के बाद गंगा में पहुंच रहा है। धौलाना में एसडीएम धौलाना और गढ़ में वह स्वयं प्रदूषण विभाग के अधिकारी के साथ मिलकर पानी की जांच करा रहे हैं। पानी के नमूने जांच के लिए भी भेजे जा रहे हैं।
ये हैं टीम में शामिल
एसडीएम, सीओ, परियोजना प्रबंधक गंगा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और संबंधित निकायों के ईओ।
एडीएम प्रशासन अच्छेलाल सिंह यादव ने कलक्ट्रेट में गंगा प्रदूषण नियंत्रित करने के लिए अधिकारियों की बैठक ली। इसमें नरौरा परमाणु केन्द्र, प्रदूषण नियंत्रण विभाग, अनूपशहर शुगर मिल, गंगा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, जल निगम, नगर निकायों, और स्याना, अनूपशहर व डिबाई के सीओ-एसडीएम ने भाग लिया।