जिले के 35 गांव ऐसे हैं जो स्वच्छ पानी के लिए तरस रहे हैं। इन गांवों की समस्या के पीछे का कारण है पानी की टंकी पर ऑपरेटर नहीं होना। ग्रामीणों ने माहवार दिए जाने वाला बिल नहीं दिया जिस वजह से पंप आपरेटरों को वेतन नहीं मिला और वे नौकरी छोड़कर चले गए। इसलिए अभी टंकी बंद होने से पानी की सप्लाई नहीं हो रही है।
शासन की राज्य पेयजल योजना मिशन के तहत जिले के 62 गांवों को स्वच्छ पानी उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से पानी की टंकी लगवाई गईं हैं। नियम है कि उप्र जल निगम द्वारा पानी की टंकी बनाकर और गांव में पाइप लाइन बिछवाकर इसके संचालन का काम ग्राम प्रधान को सौंप दिया जाता है।
नइस राशि से पानी की टंकी का रखरखाव और संविदा पर रखे जाने वाले पंप आपरेटरों का वेतन दिया जाता है लेकिन प्रधानों को बिल नहीं मिलने से पंप आपरेटरों को ग्राम प्रधान वेतन देने में असमर्थ हैं।
जल निगम के अधिशासी अभियंता इंजीनियर एके सिंहल ने बताया कि राशि के अभाव में पानी की टंकी पर आपरेटर नहीं होने से ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल की ेेसप्लाई नहीं हो पा रही है।