मुस्लिम महिलाओं के साथ अत्याचार है हलाला: फरजाना
- मुस्लिम महिलाओं के अधिकार की आवाज उठाने वाली फरजाना को मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने किया सम्मानित
- धमकी देने के आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने पर दी आंदोलन की चेतावनी, सुरक्षा की मांग
- हलाला पर उलेमा की चुप्पी को समाज के लिए बताया खतरनाक
अमर उजाला ब्यूरो
सिकंदराबाद। तीन तलाक, बहुविवाह और हलाला के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने वाली फरजाना ने कहा कि हलाला प्रथा मुस्लिम महिलाओं पर अत्याचार है। वह मुस्लिम महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष कर रही हैं। मुस्लिम महिलाओं की आवाज उठाने के लिए मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने शनिवार को फरजाना को सम्मानित किया।
नगर निवासी फरजाना ने तीन तलाक, बहुविवाह और हलाला को असंवैधानिक करार देने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। फरजाना ने कहा कि तीन तलाक, बहुविवाह, हलाला मुस्लिम महिलाओं का उत्पीड़न है। इस पर अविलंब रोक लगनी चाहिए। समाज में महिलाओं को सम्मान दिलाने और उनका उत्पीड़न रोकने के लिए उलेमा को आगे आने चाहिए। तीन तलाक, बहुविवाह और हलाला जैसी कुप्रथाओं पर रोक लगाने के लिए सहयोग करना चाहिए। मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के प्रांतीय संयोजक कदीम आलम एडवोकेट ने कहा कि मुस्लिम महिलाओं के अधिकार की आवाज उठाने के लिए वह फरजाना के हौसले को सलाम करते हैं। उन्होंने कहा कि वह मुस्लिम पर्सनल लॉ के खिलाफ नहीं, बल्कि उसमें फैली अव्यवस्था के खिलाफ हैं। बहुविवाह, तीन तलाक, हलाला मुस्लिम समाज में फैली कुरीति हैं, इस पर पाबंदी लगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वह फरजाना को निशुल्क कानूनी मदद उपलब्ध कराएंगे। साथ ही भरण पोषण के लिए मुस्लिम राष्ट्रीय मंच से 500 रुपये माहवार पेंशन दिलाएंगे और डीएम से मिलकर फरजाना की बेटी की किसी अच्छे स्कूल में निशुल्क शिक्षा की व्यवस्था करवाएंगे। उन्होंने फरजाना को धमकी देने वाले आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। उन्होंने फरजाना और उसके परिवार को सुरक्षा दिलाने का भी आश्वासन दिया। उन्होंने फरजाना की मदद कर रही समाजसेवी समीना के भाई पर संभल में हुए हमले की निंदा भी की। मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के प्रतिनिधिमंडल में रिहान खां, आबिद सैफी, प्रधान शानू चौधरी, बाबू खां आदि मौजूद रहे।