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काली नदी के किनारे बसे गांवों के हैंडपंप उगल रहे ‘जहर’

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काली नदी किनारे बसे गांवों के हैंडपंप उगल रहे ‘जहर’
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- प्रदूषित पानी पीने से एक दर्जन से ज्यादा लोगों की कैंसर से हो चुकी है मौत
- किडनी, आंतों में इंफेक्शन आदि बीमारियों से जूझ रहे कई लोग
- जहरीले पानी को लेकर अभी तक प्रशासन की ओर से नहीं हुई पहल
- करीब एक दर्जन से ज्यादा गांव प्रभावित, नहीं है स्वच्छ पानी की व्यवस्था
अमर उजाला ब्यूरो
बुलंदशहर/पहासू (खुर्जा)। काली नदी के किनारे बसे गांवों के हैंडपंप जहर उगल रहे हैं। जिसका पानी पीने करीब एक दर्जन से ज्यादा कैंसर रोग से पीड़ित लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं कई लोग किडनी इंफेक्शन समेत अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं। बावजूद इसके प्रशासन ने आज तक गांव और कस्बे में लगे हैंडपंपों के पानी की जांच करवाने की जहमत नहीं उठाई।
पहासू और छतारी क्षेत्र में काली नदी के किनारे करीब दो दर्जन से ज्यादा गांव हैं। जहां के भू जल में काली नदी का दूषित पानी समा चुका है। ऐसे में गांवों में लगे हैंडपंपों के द्वारा जमीन से निकलने वाला जहरीला पानी कैंसर जैसी खतरनाक बीमारियों का कारण बन रहा है। एक दर्जन से ज्यादा ग्रामीणों की कैंसर से मौत भी हो चुकी है। नदी के किनारे बसे गांवों में लगे हैंडपंप का पानी पीने के कारण कैंसर रोड से पीड़ित अजीजाबाद निवासी 60 वर्षीय छत्रपाल, श्रीपाल, राकेश, सोमदत्त, नवाब, सुशीला, सुरेश, सुरजावली गांव निवासी सत्यवती, बांकेलाल, छीतर, हरेन्द्र, भगवानी, गांव अमरपुर निवासी वीर सिंह, मुख्तयारी, हरिओम, रविन्द्र, विजयपाल, प्रेमपाल, नगला सारंगपुर निवासी सूरजपाल, बदरखा निवासी रनवीर समेत करीब एक दर्जन से ज्यादा लोगों की कैंसर से मौत हो चुकी है। वहीं नगला बिकूपर निवासी राजपाल कैंसर की गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। उधर पहासू कस्बा निवासी कमलेश समेत काफी संख्या में लोग किडनी इंफेक्शन, पथरी, आंतों में इन्फेक्शन समेत गंभीर बीमारियों से ग्रसित हैं। इसका पानी पशुओं के भी पीने लायक नहीं है। केन्द्रीय भूजल बोर्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार इस नदी के पानी में अत्यधिक मात्रा में सीसी, मैग्नीज और लोहा जैसे भारी तत्व मिले हैं। नदी के पानी में आक्सीजन की मात्रा बिलकुल भी नहीं है। जिससे की मछलिया अथवा अन्य जलीय जंतु जीवित रह सकें।
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मजबूरी में पीना पड़ रहा जहरीला पानी पीने के पानी की गांव में कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है। ऐसे में दूषित पानी पीने को मजबूर हैं।
विशंभर सिंह, छर्रा कुंवरपुर

कस्बे में काली नदी के करीब 100 मीटर की दूरी पर बनी पानी की टंकी से ही कस्बे में पानी की सप्लाई होती है। ऐसे में जमीन के अंदर से पानी आने के कारण लोग कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का खतरा बना है।
वीरेन्द्र वैद्य, कस्बा पहासू

अमरपुर गांव में दूषित पानी पीने से कई लोगों की कैंसर से मौत हो चुकी है। शासन-प्रशासन की ओर से आज तक पानी की जांच करने कोई नहीं आया।
महाराज सिंह, निवासी अमरपुर

पहले जो जीवन दायनी थी वह काली नदी अब काल दायनी बन गई है। कई बार दूषित पानी की शिकायत की जा चुकी है लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
भूपेन्द्र गौड़, कस्बा पहासू

कोट
मेरे कार्यकाल से पूर्व गांवों के पानी की जांच गाजियाबाद टीम द्वारा की गई थी। जांच में पानी दूषित पाया गया था, जिसके लिए शासन के आदेश पर कार्य योजना तैयार की जा रही है। जल्द ही कार्य योजना को धरातल पर लागू कर दिया जाएगा। - एसके शर्मा, एक्सईएन, जल निगम
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मामला संज्ञान में नहीं है। अगर कस्बा और ग्रामीण क्षेत्रों में दूषित पानी आ रहा है तो इसकी जांच कराई जाएगी। -हिमांशु गुप्ता एसडीएम शिकारपुर

हैंडपंपों से निकलने वाले पानी में आर्सेनिक और क्लोरीन, लेड की मात्रा ज्यादा होने से लीवर, किडनी, आंतों में इंफेक्शनहो जाता है। हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी और गुर्दा जनित बीमारियां हो जाती है। दूषित पानी से लीवर कैंसर, आंतों के कैंसर, स्किन कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां होती हैँ।
डॉ डीपी सिंह, चिकित्सक
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