मेटरनिटी विंग में गिरने लगी टाइल्स, दीवारों पर लगी सीलन
बुलंदशहर। जिला अस्पताल में करोड़ो की लागत से बने मेटरनिटी भवन की चौथी मंजिल पर टाइल्स टूटकर गिरने से घटिया सामग्री की पोल खुल रही है। साथ ही विंग की दीवारों को सीलन ने जकड़ लिया है। इससे पूर्व बिल्डिंग की छत से पानी टपकने, टाइल्स टूटकर गिरने और शार्ट सर्किट की घटनाओं का सिलसिला होने पर निर्माण को लेकर सवाल उठने लगे थे। इससे अस्पताल प्रशासन के साथ कर्मियों में हड़कंप मचा हुआ है।
जिला अस्पताल में तीन साल पूर्व पुराने भवनों को तोड़कर उसकी जगह करीब 18.91 करोड़ की लागत से मेटरनिटी विंग का निर्माण कार्य कराया गया था। मेटरनिटी विंग में अप्रैल माह से जिला महिला अस्पताल को शिफ्ट कर दिया गया। जानकारी के अनुसार जून माह में बिल्डिंग की छत से पानी टपकना शुरू हो गया, जो अभी भी छत से टपकता रहता है। सितंबर माह में तीसरी मंजिल पर मरीज भर्ती एक कमरे की दीवार की टाइल्स टूटकर गिर गई। उस समय गनीमत ये रहीं कि कमरे में एक भी महिला मरीज भर्ती नहीं थी। इसके बाद तीसरी मंजिल के जीने में टाइल्स टूटकर गिर गई। गत 10 दिन पूर्व लेबर रुम में शार्ट सर्किट होने से महिला मरीजों में भगदड़ मच गई और गेट पर करंट उतर आया। इस दौरान भगदड़ में दो-तीन महिलाएं गिरकर चोटिल भी हो गई। वहीं, विंग की दीवारों पर पानी निकासी की उचित व्यवस्था न होने पर दीवारों पर सीलन लगने लगी है। शुक्रवार को चौथी मंजिल के जीने में एक-दो नहीं बल्कि चार टाइल्स टूटकर नीचे गिर गई। टाइल्स टूटकर गिरने की जानकारी लगने पर अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया।
महानिदेशक को भी लिखा जा चुका है पत्र
- अस्पताल प्रशासन ने भविष्य में मेटरनिटी विंग की बिल्डिंग से प्रसूताओं और महिलाओं की जान को खतरा बता महानिदेशक लखनऊ, एडी मेरठ, जिलाधिकारी और सीएमओ को गत एक माह पूर्व पत्र भेजकर अवगत कराया जा चुका है। पत्र के अनुसार बिल्डिंग की छत से पानी टपकने से सीलन का आना, पानी निकासी की उचित व्यवस्था न होना और पूर्व में टाइल्स टूटकर गिरने का कारण बताया गया था। जिसके शीर्घ समाधान की मांग की गई थी। इसके समाधान होने से पूर्व अब दीवारों पर सीलन बढ़ने और टाइल्स टूटकर गिरने का सिलसिला जारी है। नाम न छापने की शर्त पर एक स्वास्थ्य कर्मी ने बताया कि अब तो बिल्डिंग से डर लगने लगा है। एक-के-बाद-एक कई घटनाएं हो चुकी हैं। मेटरनिटी विंग महिला अस्पताल के अनुरूप नहीं है और भर्ती प्रसूताओं के लिए संसाधन की कमी है। साथ ही अन्य खामियां भी लगातार सामने आ रहीं है।
कोट
मामला संज्ञान में नहीं है। पूर्व में टाइल्स टूटने और पानी टपकने को लेकर अफसरों को पत्र लिखकर अवगत कराया जा चुका है। - डॉ. बीना रानी, सीएमएस, महिला अस्पताल
कोट
मामले की जानकारी नहीं है। मामले की जानकारी की जाएगी। कुछ खामियां पूर्व में संज्ञान में आ चुकी है। जिनके समाधान के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। - डॉ. केएन तिवारी, सीएमओ