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यमराज के दर्शन करा सकती है ये एंबुलेंस.... इलाज की दरकार

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जिले की बीमार एंबुलेंस को खुद इलाज की दरकार
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बुलंदशहर। सड़क हादसे में कोई गंभीर रूप से घायल हो या कोई गंभीर रूप से बीमार मरीज या प्रसूता, सभी को समय से उपचार की आवश्यकता होती है। लोगों की इन जरूरतों को पूरा करती है एंबुलेंस। यदि ये जीवनदायिनी एंबुलेंस आपातकाल में बंद हो जाए तो इसमें सवार मरीज की सांसों की डोर टूट सकती है। सब कुछ जानने के बाद भी अफसर अंजान बने हुए हैं।
सपा शासनकाल में सरकारी अस्पतालों में मरीजों एवं घायलों को लाने ले जाने के लिए 108 नंबर एंबुलेंस गाड़ियां चलाई गईं थीं। साथ ही केंद्र सरकार की ओर से 102 नंबर एंबुलेंस गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाने को लेकर संचालित हैं। घायलों के एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचने पर उनकी जान बच जाती है। जिले में इस समय 102 की 41 और 108 की 29 एंबुलेंस संचालित हैं। शुरुआती दौर में मरीजों को तत्काल समय पर पहुंचाती थीं, लेकिन अब कई बार फोन मिलाने के बाद भी समय से नहीं पहुंचा पा रही है। मरीजों और तीमारदारों द्वारा इसकी शिकायत की गई, जिसे अफसरों द्वारा ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। अमर उजाला की टीम ने एंबुलेंस का हाल देखा तो सालों पहले शुरू हुई यह एंबुलेंस सही मरम्मत के अभाव में जर्जर नजर आई। गर्भवती महिलाओं और मरीजों को अस्पताल पहुंचाते समय यह अचानक खराब हो जाती हैं। परिजन उसे अन्य वाहन की व्यवस्था कर या दूसरी एंबुलेंस आने पर अस्पताल लेकर जाते हैं। एंबुलेंस चालकों ने बताया कि कई बार अफसरों का अवगत करा चुके है, लेकिन अफसरों द्वारा इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
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खराब हो चुकी हैं अधिकांश एंबुलेंस
कुछ एंबुलेंस की फिटनेस खराब हो चुकी है तो कुछ की मियाद पूरी हो चुकी है। वहीं, किसी एंबुलेंस में नीली बत्ती, तो अधिकांश में दोनों साइड में लगे इंडिकेटर भी टूटे हुए है। साथ ही कुछ एंबुलेंस के गेट रस्सी से बंधे हुए है। अधिकांश एंबुलेंस की हालत ऐसी है कि ये कभी भी बंद हो सकती है। इससे इन एंबुलेंस में सवार मरीज की जान को भी खतरा बन सकता है।

ऑक्सीजन व दवाओं के साथ आग से बचने का अभाव
गंभीर रोगियों को यदि ऑक्सीजन की जरूरत एंबुलेंस में पड़ जाए तो उसे समय से ऑक्सीजन नहीं मिल सकती। इसकी वजह अधिकांश एंबुलेंस में ऑक्सीजन मॉस्क गंदा हुआ पड़ा है, तो कुछ में मॉस्क को पॉलिथीन में बंद कर रखा है। साथ ही सिलेंडर में गैस भी नहीं रहती। वहीं, आग बुझाने को लेकर बचाव की भी व्यवस्था नहीं है। क्योंकि गत माह पूर्व अफसरों के निरीक्षण में गैस सिलेंडर एक्सापयर मिलने के साथ कम मात्रा में गैस पाई गई।
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कोट
मामला संज्ञान में है। गत सप्ताह कुछ एंबुलेंसों का निरीक्षण किया गया था। जिसमें खामियां मिलने पर सही कराने के निर्देश दिए है। बिना फिटनेस पास एंबुलेंस चलने पर कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. केएन तिवारी, सीएमओ
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