तो अगले 30 सालों में पांच हजार बीघा जमीन को बंजर कर देगी पॉलिथीन
- शहर में हर दिन करीब 40 टन पॉलिथीन फेंकी जाती है कूड़े में
- पॉलिथीन बैन अभियान रहा फेल तो अगली पीढ़ी को झेलने पड़ेंगे दुष्परिणाम
- शासन के आदेश पर आज से पॉलीथिन बैन, अफसर सतर्क
- गांवों में कैंप लगाकर किया जाएगा लोगों को जागरूक
अमर उजाला ब्यूरो
बुलंदशहर। पॉलिथीन पर बैन में यदि सख्ती नहीं बरती गई तो अगले 30 सालों में जिले की पांच हजार बीघा जमीन बंजर हो जाएगी। बड़े पैमाने पर पॉलिथीन के प्रयोग से आने वाली पीढ़ी को प्रदूषण के दुष्परिणाम झेलने होंगे। अब रविवार से पॉलिथीन पर बैन लगाने के आदेशों के बाद अफसर गांव व शहर में चौपाल लगाकर लोगों को जागरूक करेंगे। कई स्थानों पर यह सिलसिला शुरू हो गया है।
जिले में प्रतिदिन 50 टन से अधिक पॉलिथीन का प्रयोग किया जा रहा है। यह पॉलिथीन घरों से कूड़े के रूप में डंपिंग ग्राउंड या खेतों में पहुंच जाती है। कूड़े में पड़ी सैकड़ों टन पॉलिथीन प्रतिदिन जमीन के अंदर जाकर जमीन को बंजर बनाने का कार्य कर रही है। पॉलिथीन जमीन के अंदर कई सौ साल रहने के बाद भी नष्ट नहीं होती है। इसके अलावा भूगर्भ जल को भी दूषित करने में पॉलिथीन की भूमिका अहम है। ऐसे में जमीन से निकलने वाला पानी भी अब प्रदूषित हो रहा है। जिसके चलते लोगों में विभिन्न प्रकार की बीमारियां फैल रही हैं। अब शासन द्वारा पॉलिथीन पर बैन लगाने के आदेशों के बाद अफसर शासन के आदेशों के प्रति कितने गंभीर होंगे, यह आने वाला समय ही बताएगा। लेकिन इतना तय है कि अगर इस बार अभियान विफल रहा तो परिणाम खतरनाक होंगे।
एक वर्ग किमी जमीन को बर्बाद कर देती है 15 हजार टन पॉलिथीन
15 हजार टन पॉलिथीन एक वर्ग किमी के दायरे को पूरी तरह से बंजर बना देती है। साथ ही उक्त स्थान पर लगे नल, सबमर्सिबल पंप, ट्यूबवेलों से दूषित जल निकलता है, जिससे सांस, फेफड़े और त्वचा संबंधी रोग होते हैं।
आने वाली पीढ़ी हो जाएगी पूरी तरह बर्बाद
पॉलिथीन बैन का सख्ती से पालन नहीं कराया गया तो आने वाले 30 सालों में नई पीढ़ी पूरी तरह से बर्बाद हो जाएगी। जानकारों के मुताबिक आने वाले 30 सालों में जिले की पांच हजार बीघा जमीन पूरी तरह से बंजर हो जाएगी। साथ ही दूषित जल के कारण नई पीढ़ी विभिन्न बीमारियों की गिरफ्त में होगी।
मानकों को ताक पर रखकर पॉलीथिन का प्रयोग धड़ल्ले से हो रहा है। कूड़े में पड़ी पॉलीथिन से हानिकारक गैसों का उत्सर्जन होता रहता है जो वायु प्रदूषण को बढ़ावा दे रहा है। पॉलीथिन से निकलने वाली गैसों में मुख्यत: बेंजीन, क्लोराइड, विनायल, इथनाल ऑक्साइड हैं।
रोजमर्रा की चीजों में भी हो रहा प्रयोग
वैसे तो पॉलिथीन में कैरी बैग पर ही सबसे अधिक सवाल उठते हैं, लेकिन, सचाई यह है कि इन दिनों रोजमर्रा की चीजों में शुमार दूध, दही, चिप्स, बिस्कुट, ब्रेड, गुटखा, शैंपू, तेल, नमक, दाल, चावल व आटा तक पॉलिथीन पैक में बाजार और बाजार से घरों तक पहुंच रहा है। इसके अलावा अन्य दर्जनों उत्पाद ऐसे हैं जो पालीथिन में पैक होकर लोगों तक पहुंच रहे हैं। बावजूद इसके इस ओर किसी का ध्यान नहीं जा रही है।
पशुओं के लिए भी जानलेवा है पॉलिथीन
पॉलिथीन की वजह से आए दिन पशुओं की मौत हो रही है। पॉली बैग में फेंके गए खाद्य पदार्थ के साथ पशु अक्सर पॉलिथीन को भी खा लेते हैं। इसके चलते धीरे-धीरे उनके पेट में पॉलिथीन एकत्रित हो जाती है और उनकी भूख खत्म हो जाती है। नतीजतन, पशु खाना पीना छोड़ देता है और उसकी मौत हो जाती है।
तीन साल पहले नगर पालिका में बैन हुई थी पॉलिथीन
तीन साल पहले भी शासन ने नगर पालिका क्षेत्रों में पॉलिथीन बैन करने के आदेश दिए थे। आदेशों के तहत नगर पालिका अफसरों ने भी खानापूरी करते हुए इक्का-दुक्का व्यापारियों के प्रतिष्ठान पर छापामार कार्रवाई करते हुए इतिश्री कर ली। इसके बाद भी लगातार जिले में पॉलीथिन का प्रयोग हो रहा है, लेकिन अफसरों ने कभी कार्रवाई करने की जहमत नहीं उठाई। इसके चलते जिले में न केवल सामान्य लोग बल्कि व्यापारी भी खुलेआम सैकड़ों क्विंटल पॉलिथीन का प्रयोग प्रतिदिन कर रहे हैं।
व्यापारियों ने किया बैठक का आयोजन
पॉलिथीन बैन को सफल बनाने के लिए शनिवार को व्यापारियों ने बैठक की। इसमें उन्होंने पॉलिथीन का प्रयोग न करने की शपथ ली। जिलाध्यक्ष राजेंद्र अग्रवाल ने कहा कि पॉलिथीन को बैन करने में व्यापारी अपना पूरा सहयोग देंगे। सामान्य लोगों को भी पॉलिथीन के प्रयोग से बचना होगा। इसके स्थान पर जूट आदि के बैग इस्तेमाल करने होंगे। मौके पर बैठक में विजय गुप्ता, धर्मराज, प्रीतम, जेपी भारद्वाज, अशोक कुमार मौजूद रहे।
कोट
बड़ी मात्रा में पॉलिथीन जिस क्षेत्रों में कूड़े में पड़ी होती है, वहां पर रहने वाले लोगों में खून के थेलेट्स की मात्रा बढ़ जाती है। इससे गर्भ में पल रहे बच्चे का विकास रुक जाता है। पॉलीथिन बनाने में उपयोग होने वाला बिस्फेनॉल नामक रसायन शरीर में डायबिटीज व लीवर को खासा नुकसान पहुंचाता है। वहीं पालीथिन को जलाने से कार्बन डाईआक्साइड, कार्बन मोनोआक्साइड जैसी विषैली गैसें निकलती हैं। इससे सांस व त्वचा की बीमारियां होने की अधिक आशंका रहती है। - डॉ. एस के गर्ग, वरिष्ठ फिजीशियन
पॉलिथीन से वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण होने के साथ जमीन की उर्वरा शक्ति भी क्षीण होती है। धीरे-धीरे यह जमीन को बंजर बना देती है। पॉलिथीन से निकलने वाली गैस से लोगों में फेफड़े, सांस, त्वचा संबंधी बीमारियां फैलती हैं। पॉलिथीन पर बैन के लिए अफसरों के साथ अभियान चलाया जाएगा। व्यापारियों पर भी कार्रवाई की जाएगी। - जीएस श्रीवास्तव, क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी
पॉलिथीन पर बैन का सख्ती से पालन किया जाएगा। इसके लिए लोगों को जागरूक करने के साथ आदेशों की अवहेलना पर जुर्माना या सजा भी दी जाएगी। किसी भी हाल में पॉलिथीन का प्रयोग नहीं होने दिया जाएगा। - एके सिंह, ईओ, नगर पालिका बुलंदशहर