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किसान बोले, विश्वविद्यालय बनेगा तो देंगे जमीन

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किसान बोले, विश्वविद्यालय बनेगा तो देंगे जमीन
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फोटो समाचार
- हमें चाहिए यूनिवर्सिटी
- किसान संघर्ष समिति ने बैठक कर विवि की मांग को जायज ठहराया
- विवि की मांग को लेकर छात्र-छात्राओं ने भी की आवाज बुलंद
अमर उजाला ब्यूरो
बुलंदशहर। जिले में विश्वविद्यालय की मांग लगातार जोर पकड़ती जा रही है। अब किसानों ने इस मांग को जायज ठहराते हुए कहा है कि यदि विश्वविद्यालय बनता है तो हम जमीन देने के लिए तैयार हैं। किसानों ने गांव बंचावली स्थित गोशाला में किसान संघर्ष समिति के बैनर तले बैठक कर इस मांग को मुख्यमंत्री के दरबार में उठाने का निर्णय लिया। बता दें कि विश्वविद्यालय की मांग को लेकर अमर उजाला ने मुहिम चलाई हुई है। इस मुहिम को लेकर छात्र-छात्राओं की आवाज भी लगातार बुलंद होती जा रही है।
किसान संघर्ष समिति के जिलाध्यक्ष संग्राम सिंह ने कहा कि जिले में विश्वविद्यालय की जरूरत है। विश्वविद्यालय कहीं भी बने लेकिन जिले में बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि समिति की ओर से गांव सुल्तानपुर में विश्वविद्यालय खोलने के लिए ग्राम सभा 100 बीघा से अधिक जमीन का प्रस्ताव पास कर चुकी है। इस मांग को मुख्यमंत्री के समक्ष भी उठाया जा चुका है। अमर उजाला की मुहिम ने किसानों का और मनोबल बढ़ा दिया है और अब इस मांग को लेकर समिति के पदाधिकारी एक बार फिर मुख्यमंत्री से मुलाकात कर विश्वविद्यालय की मांग करेंगे। मुख्यमंत्री को छात्र-छात्राओं की समस्या से भी अवगत करवाया जाएगा। यदि विश्वविद्यालय एनआरइसी कॉलेज को बनाया जाता है तो उसके नाम की ब्रांच विश्वविद्यालय को प्रस्तावित की गई गांव सुल्तानपुर की जमीन को दे दिया जाएगा। बैठक में अनिल प्रधान, पप्पू प्रधान, रंधीर सिंह, जगवीर प्रधान, रविंद्र निठारी, गजेंद्र बंचावली, मास्टर नरेंद्र सिंह सुल्तानपुर आदि किसान शामिल रहे।
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छात्र-छात्राओं के बोल...
आज हर कोई उच्च शिक्षा पाने की ख्वाइश रखता है। मगर, जिले में सीट कम हैं और ऐसे में अधिकतर छात्र प्रवेश से वंचित रह जाते हैं। विवि की मांग को लेकर उठाई गई आवाज में सभी छात्र-छात्राओं को अपनी आवाज बुलंद कर शासन तक पहुंचानी होगी। - छात्र पवन सैनी, ककोड़।

विवि बनेगा तो बीए से लेकर आगे तक की कक्षाओं में प्रवेश पाने के लिए दूसरे जिलों और राज्यों में जाने की जरूरत नहीं रहेगी। यह मांग काफी पुरानी है और अब समय आ गया है कि शासन छात्र-छात्राओं की परेशानी को देखते हुए पूरा करे। - छात्र यनित गुर्जर, गांव जुगसाना।
बीए, बीएससी और बीकॉम आदि प्रथम वर्ष की कक्षाओं से आगे की पढ़ाई के लिए मेरठ या फिर दिल्ली आदि शहरों में जाना पड़ता है। ऐसे में समय बर्बाद होने के साथ खर्च भी अधिक होता है। यदि जिले में विवि बनता है तो सब परेशानी दूर हो जाएंगी। - छात्र नीटू ठाकुर, गांव जलालपुर।
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छात्र हो या छात्रा हर किसी की ख्वाइश होती है कि इस आधुनिक युग में अधिक से अधिक शिक्षा ग्रहण करें। मगर, जिले के लिए यह विडंबना है कि अभी ऐसा कोई महाविद्यालय नहीं है, जहां पर सभी सुविधाएं मिल सके। - छात्र वेद चौधरी, आवास विकास।
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