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स्वच्छ पेयजल उपलब्ध करवाने पर खर्च होंगे 14.44 करोड़

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स्वच्छ पेयजल उपलब्ध करवाने पर खर्च होंगे 14.44 करोड़
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बुलंदशहर। गांवों में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध करवाने पर 14.44 करोड़ रुपये खर्च होंगे। ग्रामीण पेयजल योजना (सीएसएस) के तहत गांवों में पाइप लाइन बिछाई जाएगी। जनपद में जहां पानी की गुणवत्ता प्रभावित है ग्राम्य विकास विभाग ने ऐसे ग्रामों को चिन्हित करने का काम शुरू कर दिया है।
जिले में भूजल स्तर गिरता जा रहा है। इसके चलते अब तक जिले के 16 ब्लॉक में से 12 ब्लॉक डार्क जोन में शामिल हो चुके हैं। जहां पानी काफी नीचे चला गया है, वहां पर हैंडपंप का पानी भी स्वच्छ नहीं रहा और लोग उसे पीकर बीमार हो रहे हैं। इसके साथ ही काली नदी के आसपास बसें गांवों का पानी भी दूषित हो चुका है और हैंडपंप जहरीला पानी उगल रहे हैं। ऐसे गांवों में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध करवाने के लिए 14.44 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। ग्रामीण पेयजल योजना के तहत इसकी शुरूआत होगी। गुणवत्ता प्रभावित गांवों को चिन्हित करने का काम शुरू हो गया है और यह कार्य ग्राम्य विकास विभाग के नेतृत्व में होगा। अफसरों का कहना है कि यदि सब कुछ ठीक रहा तो जल्द ही लोगों को स्वच्छ पेयजल मिलेगा और बीमारियों से भी निजात मिलेगी। स्वच्छ पेयजल पानी की टंकी और गहरे सरकारी हैंडपंप आदि लगाकर उपलब्ध करवाया जाएगा।
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काली नदी के किनारे वाले गांवों को मिलेगी पहली प्राथमिकता
स्वच्छ पेयजल उपलब्ध करवाने के लिए सबसे पहले काली नदी के किनारे वाले उन गांवों को प्राथमिकता मिलेगी, जिनका पानी दूषित हो चुका है। इन गांवों में ऊटरावली, अमरपुर, अजीजाबाद, कुंअरपुर, पहासू आदि गांव शामिल हैं। बता दें कि काली नदी का पानी लगातार दूषित होता जा रहा है। इसके चलते हैंडपंप जहर उगल रहे हैं। हैंडपंपों से निकलने वाले पानी में आर्सेनिक, क्लोरीन और लेड की मात्रा अधिक होने से लीवर, किडनी और आंतों में इंफेक्शन हो जाता है। हेपेटाइटिस बी और सी के अलावा गुर्दा जनित बीमारियां हो जाती हैं। इसी तरह की कुछ परेशानी उन स्थानों पर भी देखी जा रही है, जहां भूजल स्तर काफी नीचे चला गया है या फिर उन गांवों के आसपास फैक्ट्री आदि हैं। ऐसे गांव सिकंदराबाद औद्योगिक क्षेत्र और खुर्जा पॉटरी क्षेत्र में हैं। इन सभी गांवों में स्वच्छ पेजयल उपलब्ध करवाया जाएगा।

हर साल गिर रहा 20 से 40 सेंटीमीटर भूजल
बारिश कम होने से हर साल जिले में 20 से 40 सेंटीमटर भूजल गिर रहा है। भूजल स्तर भी 200 फीट से नीचे पहुंच गया है। लघु सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता श्यौदान सिंह ने बताया कि जहां पर नहर और रजवाहे गुजर रहे हैं। वहां पर भूजल की स्थिति अच्छी है, लेकिन जिले के अधिकतर हिस्से में भूजल स्तर लगातार खिसकता जा रहा है।

जिले के ब्लॉकों की स्थिति
जिले में लगातार भूजल गिरने से 16 ब्लाूकों में से चार ब्लॉक सुरक्षित बचे हैं। ब्लॉक पहासू, दानपुर, शिकारपुर, खुर्जा और बीबीनगर क्रिटिकल श्रेणी में शामिल हैं। सिकंदराबाद, गुलावठी और बुलंदशहर अतिदोहित श्रेणी में शामिल हैं। डिबाई, जहांगीराबाद, ऊंचागांव और स्याना सेमी क्रिटिकल में हैं। जबकि अगौता, अनूपशहर, अरनिया और लखावठी ब्लॉक ही सुरक्षित श्रेणी में हैं।
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जिले में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध करवाने पर इस वर्ष 14.44 करोड़ की राशि खर्च की जाएगी। ग्रामीण पेयजल योजना (सीएसएस) के तहत काम होगा और इसके लिए गांवों को चिन्हित करने का काम शुरू हो गया है। सबसे पहले काली नदी के किनारे वाले उन गांवों को प्राथमिकता दी जाएगी, जहां पर पानी दूषित हो चुका है। - सर्वेश चंद, परियोजना निदेशक, ग्राम्य विकास अभिकरण विभाग, बुलंदशहर।
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