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अफसरों ने फर्जी तरीके से मंडी समिति की जमीन पर दिया था कब्जा

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अफसरों ने फर्जी तरीके से मंडी समिति की जमीन पर दिया था कब्जा
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- एसडीएम सदर कोर्ट की जांच में अफसरों का कारनामा आया सामने
- एसडीएम सदर कोर्ट ने अनूपशहर एसडीएम व सीओ को कब्जा मुक्त कराने के लिए जारी किए आदेश
- वर्ष 1983 में मंडी के लिए अधिग्रहण की गई जमीन को अवैध रूप से किया था किसान को वापस
- तत्कालीन एसएलएओ ने बिना किसी आदेश के अवैध रूप से वापस की थी 1.4 बीघा जमीन

अमर उजाला ब्यूरो
बुलंदशहर। जहांगीराबाद मंडी समिति की जमीन को करीब 35 वर्ष पूर्व तत्कालीन अफसरों ने अवैध रूप से किसानों को वापस कर दिया । जबकि अधिग्रहण की गई जमीन को वापस करने के लिए कोई नियम कानून नहीं था। अब एसडीएम सदर अरविंद सिंह (आईएएस) के कोर्ट से तत्कालीन अफसरों को दोषी ठहराते हुए अवैध कब्जा की गई जमीन को कब्जा मुक्त कराने के आदेश दिए हैं।
जानकारी के अनुसार वर्ष 1983 में जहांगीराबाद में अनाज मंडी बनाने के आदेश जारी किए गए थे। आदेशों के तहत अफसरों ने मंडी के लिए 11 बीघा 18 विस्वा व 6 विस्वांसी जमीन का अधिग्रहण कर किसानों को मुआवजा वितरित कर दिया था। जिसके बाद मंडी समिति ने अपना कार्य शुरू किया तो अधिग्रहण की गई जमीन के रकबा संख्या 2765 की जमीन एक बीघा 4 विस्वा, 10 विस्वांसी को मंडी समिति ने अपनी चार दीवारी के बाहर छोड़ दिया। एसडीएम सदर कोर्ट की जांच में पता चला कि उस समय जमीन के पूर्व मालिकों ने तत्कालीन एसएलएओ व मंडी सचिव से मिलीभगत करके अधिग्रहण की गई जमीन को वापस अपने नाम करा लिया और मंडी द्वारा दिया गया मुआवजा भी वापस कर दिया। जबकि एक बार अधिग्रहण की गई जमीन को वापस करने का अधिकार अफसरों को था ही नहीं। इससे पूर्व पूरे मामले में तत्कालीन एसएलएओ ने एक पत्र तत्कालीन डीएम को लिखकर उक्त जमीन को मंडी समिति के लिए उपयोगी न बताते हुए वापस करने के आदेश पारित करने की मांग की थी, लेकिन तत्कालीन डीएम पूरे मामले को शासन भेजती इससे पूर्व ही एसएलएओ ने जमीन को संबंधित किसान को वापस कर दिया। मामले का खुलासा होने पर वर्ष 1994 में अनूपशहर एसडीएम कोर्ट में वाद दायर किया, लेकिन मंडी समिति ने उक्त जमीन को वापस अपने नाम कराने के लिए कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। और 2001 तक मंडी का कोई भी अधिकारी केस की पैरवी के लिए नहीं आया। इसके बाद सिटी मजिस्ट्रेट कोर्ट में 2011 तक केस चला, लेकिन इस दौरान भी कोई अधिकारी केस की पैरवी के लिए नहीं आया। इसके बाद केस को एसडीएम सदर के कोर्ट में स्थानांतरित किया गया। करीब 35 साल के बाद अब एसडीएम सदर अरविंद सिंह (आईएएस) के कोर्ट ने मामले में फैसला सुनाते हुए तत्कालीन अफसरों को दोषी मानते हुए जमीन पर वापस कब्जा लेने के आदेश दिए हैं।
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आरोपियों से वसूला जाएगा जुर्माना
एसडीएम कोर्ट ने मंडी समिति की जमीन पर अवैध कब्जा करने के मामले में आरोपियों पर जुर्माना लगाने के आदेश दिए हैं। 13 जुलाई 1994 से आदेश की तारीख तक आरोपियों से 4000 रुपये प्रतिमाह की दर से जुर्माना बतौर क्षतिपूर्ति वसूल किया जाएगा।

जमीन खाली करने का नोटिस चस्पा
गाटा संख्या 2765 के रकवा 1-4-10 पर किए गए अवैध कब्जा को खाली करने के लिए धारा 9 (2) के तहत कोर्ट ने नोटिस चस्पा करा दिया है। अवैध कब्जा करने वालों को 30 दिनों का समय देते हुए खुद ही अवैध कब्जा हटाने के आदेश दिए हैं, अन्यथा की स्थिति में एसडीएम अनूपशहर व सीओ अनूपशहर पुलिस फोर्स के साथ बल पूर्वक कब्जा हटाने के आदेश कोर्ट ने दिए हैं।

11 साल तक अफसरों ने साधा मौन
मंडी समिति के लिए अधिग्रहण की गई जमीन को अवैध रूप से वापस करने के मामले में मंडी के अफसर 11 साल तक चुप्पी साधे रहे। वर्ष 1983-84 में अवैध कब्जा मुक्त की गई जमीन को कब्जा मुक्त कराने के आदेशों के बाद भी अफसर नहीं चेते और 11 साल के लंबे इंतजार के बाद 1994 में अफसरों ने मामले में एक वाद दायर किया।
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विशेष भूमि अध्यापित अधिकारी ने किया था फर्जीवाड़ा
तत्कालीन विशेष भूमि अध्यापित अधिकारी ने पूरे मामले में बड़ा फर्जीवाड़ा किया था। एसएलएओ ने रकवा 1-4-10 के डिनोटिफिकेशन के लिए 02 जनवरी 1983 को एक पत्र डीएम को लिखते हुए उक्त जमीन के डिनोटिफिकेशन के लिए शासन से अनुमति की मांग की थी, लेकिन पत्र लिखने के मात्र चार दिन बाद ही 6 जनवरी 1983 को एसएलएओ ने तहसीलदार अनूपशहर को आदेश जारी कर दिए थे।
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