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वार्ड ब्वॉय..अपंजीकृत चिकित्सक लिख रहे अल्ट्रासाउंड

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कमीशन के लिए वार्ड ब्वॉय भी बने ‘डाक्टर’
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अमर उजाला ब्यूरो
बुलंदशहर। अल्ट्रासाउंड सेंटरों से मिलने वाले मोटे कमीशन के चक्कर में जिले के सरकारी अस्पतालों के वार्ड ब्वॉय भी ‘डाक्टर’ बन गए। वार्ड ब्वॉय के साथ डाक्टर शब्द सुनकर आप चौंक गए होंगे, लेकिन अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर छापेमारी के दौरान जब्त किए कागजातों से जो खुलासा हुआ है उससे हमारी बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल जरूर खोलता है। खुलासा हुआ है कि बड़े पैमाने पर सरकारी अस्पतालों के वार्ड ब्वॉय और अपंजीकृत चिकित्सक अल्ट्रासाउंड के लिए परामर्श लिखकर मरीजों को अपने चहेते सेंटरों पर भेज रहे हैं, जबकि इसके लिए परामर्श सिर्फ डाक्टर ही लिख सकता है। छापेमारी के बाद शहर के तीन सेंटरों पर कार्रवाई की गई, जिनमें से दो सेंटरों के लाइसेंस निरस्त करने की तैयारी है।
सोमवार देर शाम एसडीएम सदर अरविंद सिंह (आईएएस) ने टीम बनाकर अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर छापेमारी की। टीम के पहुंचते ही अल्ट्रासाउंड सेंटर संचालकों में हड़कंप मच गया। वहीं कार्रवाई की सूचना पर पर आनन-फानन में शहर के अन्य अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर ताला लटक गया। एसडीएम सदर ने बताया कि छापेमारी के दौरान अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर सरकारी अस्पतालों के वार्ड ब्वॉय, अपंजीकृत चिकित्सकों द्वारा अल्ट्रासाउंड लिखे जाने का खुलासा हुआ है। बताया जा रहा है कि इन सेंटरों से जब्त किए गए दस्तावेजों से मिली जानकारी के अनुसार एक माह में दो सौ से अधिक मरीजों का अल्ट्रासाउंड अपंजीकृत चिकित्सक व वार्ड ब्वॉय के परामर्श पर किया गया है। सूत्रों ने दावा किया कि अपंजीकृत चिकित्सक और वार्ड ब्वॉय मरीजों को केवल सादा कागज पर पर्ची बनाकर उस पर अल्ट्रासाउंड और नीचे अपना नाम लिखते हैं। जिसके माध्यम से इन्हें कमीशन का वितरण किया जाता है।
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अल्ट्रासाउंड लिखने का यह होता है नियम
अल्ट्रासाउंड लिखने के लिए परामर्शदाता चिकित्सक को आवश्यक है कि वह अपने लैटरहेड पर मरीज का पूरा ब्योरा लिखने के साथ उसकी बीमारी का भी उल्लेख करे। साथ ही किसी भी मरीज को निर्धारित अल्ट्रासाउंड सेंटर पर अल्ट्रासाउंड कराने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है।

दो सेंटरों पर जल्द की जाएगी कार्रवाई
सूत्रों ने दावा किया है कि जिन तीन सेंटरों पर कार्रवाई की गई, उनमें से दो सेंटरों पर बड़े पैमाने पर अनियमितताएं मिली हैं। एसडीएम ने पूरे मामले में नाराजगी जताते हुए दोनों सेंटर संचालकों के लाइसेंस रद करने के लिए डीएम को पत्र लिखने की तैयारी है।

मासिक रिपोर्ट का सीएमओ भी नहीं करते निरीक्षण
अल्ट्रासाउंड सेंटरों से आने वाली मासिक रिपोर्ट का सीएमओ द्वारा भी निरीक्षण नहीं किया जाता है। बड़ी संख्या में अपंजीकृत चिकित्सक अल्ट्रासाउंड लिख रहे हैं, लेकिन सीएमओ इसकी फाइल को देखते भी नहीं, जिसके चलते इन पर कार्रवाई नहीं की जाती है।
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कोट -
तीन अल्ट्रासाउंड सेंटर पर छापेमार कार्रवाई की गई। कार्रवाई के दौरान बड़े पैमाने पर अनियमितताएं मिली हैं। दो सेंटरों पर कार्रवाई के लिए लिखा जा रहा है। तीसरे के दस्तावेजों की जांच की जा रही है। किसी भी हालत में अवैध रूप से अल्ट्रासाउंड नहीं होने दिए जाएंगे, यदि सेंटर संचालक बाज नहीं आते हैं तो पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत कार्रवाई कराई जाएगी। - अरविंद सिंह, एसडीएम सदर (आईएएस)

मामला मेरी जानकारी में नहीं है। यदि वार्ड ब्वॉय द्वारा अल्ट्रासाउंड लिख रहे हैं तो यह गंभीर विषय है। इसकी जांच कराकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. केएन तिवारी, सीएमओ
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