मलिन बस्तियों में नहीं विकास...शहर कैसे होगा साफ
- आधुनिक सुविधाओं से वंचित हैं शहर की 12 मलिन बस्तियां
- भीषण गर्मी में पेयजल को भी तरस रहे हैं लोग
अमर उजाला ब्यूरो
बुलंदशहर।
शहर को साफ करने के दावे तो बहुत किए जाते हैं, लेकिन मलिन बस्तियों में फैली गंदगी इन दावों को मुंह चिढ़ाती नजर आती है। शहरी क्षेत्र के पास की मलिन बस्तियों में लोगों को आधुनिक सुख-सुविधाओं से महरूम रखा गया है, जिसके चलते लोगों को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है। मलिन बस्तियों की गंदगी के चलते शहर की सुंदरता को भी ग्रहण लग रहा है।
साफ-सफाई के लिए केंद्र और प्रदेश सरकार की ओर से स्वच्छता अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के तहत जिले में भी अफसर सफाई व्यवस्था को दुरुस्त होने का दावा कर रहे हैं, लेकिन शहर की मलिन बस्तियों में फैली गंदगी स्वच्छता अभियान को झटका दे रही है। ऐसे में शहर के साफ होने की उम्मीद फिलहाल कम ही नजर आ रही है। नगर पालिका के रिकॉर्ड के अनुसार शहरी क्षेत्र में एक दर्जन मलिन बस्तियां हैं। इन बस्तियों में करीब 50 हजार लोग निवास करते हैं। अफसरों की बेरुखी का आलम यह है कि मलिन बस्तियों में रहने वाले लोगों को सुख सुविधाएं देने के नाम पर केवल कागजी घोड़े दौड़ रहे हैं। जमीनी हकीकत की पड़ताल करने पर पता चलता है कि इन लोगों को पीने के लिए शुद्ध पानी भी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। शुद्ध पानी के लिए बस्ती के लोग काफी दूर स्थित नल, टंकियों से पानी लाने के लिए मजबूर होते हैं। भीषण गर्मी के मौसम में लोग छोटे-छोटे बच्चों को दूर से पानी लाने के लिए भेज देते हैं, जो बड़ी कठिनाइयों से जूझते हुए पानी की बाल्टी सर पर रखकर घर पहुंचते हैं।
सड़कों पर फैली रहती है गंदगी
मलिन बस्तियों से कूड़े के उठान की भी कोई व्यवस्था अफसरों ने नहीं की है, जिसके चलते बस्ती में सड़कों पर ही कूड़ा फैला रहता है। कूड़े से निकलने वाली गंदगी से आते-जाते समय लोगों को भी काफी परेशानी झेलनी पड़ती है।
यें हैं शहर की मलिन बस्तियां
भूड़ (आंशिक), साठा (आंशिक), राधानगर (आंशिक), टांडा (आंशिक), स्याना रोड, कंजर बस्ती, इस्लामाबाद, धमैड़ा रोड, मुस्तफागढ़ी (आंशिक), नरसलघाट, रुकन सराय (आंशिक), सरायधारी
लोग बोले
विकास के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है। लोगों को पीने के लिए साफ पानी भी नहीं मिल पा रहा है। - राजकली
मलिन बस्तियों में अफसरों द्वारा सफाई के लिए भी कोई इंतजाम नहीं किए हैं। लोगों को बिना सुविधाओं के काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है। - बीना देवी
मलिन बस्तियों की उपेक्षा अफसर करते रहे हैं। कई बार शिकायत के बाद जर्जर सड़क और नालियां नहीं बनाई गई हैं। इससे बारिश के समय में रास्ते पर पानी भर जाता है। - देवकी
अफसरों की बेरुखी से लोग गांव से भी बदतर जीवन जीने के लिए मजबूर हैं। कई बार शिकायत के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हुई है। - कमलेश
कोट-
मलिन बस्तियों में विकास के लिए शासन स्तर से धनराशि उपलब्ध कराई जाती है। इसके अलावा डूडा विभाग द्वारा इन बस्तियों में कार्य कराया जाता है। शासन से मिलने वाली धनराशि से विकास कार्य कराए जाते रहे हैं। - एके सिंह, ईओ, नगर पालिका