अब सीएचसी-पीएचसी से भी मिलेगा शव वाहन
- शव वाहन नहीं मिला तो नपेंगे प्रभारी चिकित्सक
- शासन ने किया सुविधा में विस्तार, मिलेगा एक और शव वाहन
- कंधे पर शव ले जाने का मामला आया सामने तो सीएमओ होंगे जिम्मेदार
अमर उजाला ब्यूरो
बुलंदशहर।
जिला अस्पताल के साथ ही अब सीएचसी व पीएचसी में भर्ती मरीज की मौत होने पर शव घर पहुंचाने का इंतजाम स्वास्थ्य विभाग करेगा। अगर कहीं पर शव वाहन न मिलने या कंधे पर शव ले जाने का मामला प्रकाश में आया तो अस्पताल प्रभारी के साथ ही उस जिले के सीएमओ के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। शासन ने सुविधाओं में विस्तार करते हुए यह सख्त निर्देश जारी किए हैं।
शासन के प्रमुख सचिव स्वास्थ्य प्रशांत त्रिवेदी ने बृहस्पतिवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग कर सभी जिलों में शव को ले जाने के संसाधनों की समीक्षा की। उन्होंने सीएमओ और जिला अस्पतालों के सीएमएस को जमकर फटकार लगाई। उन्होंने सभी सीएमओ और सीएमएस को निर्देश दिए कि शव की दुर्गति न हो और सम्मान के साथ शव घर तक भिजवाने के लिए राजकीय शव वाहन का प्रयोग किया जाए। चेतावनी दी कि यदि कहीं पर भी शव को कंधे पर या अन्य किसी प्रकार से ले जाने की शिकायत मिलती है तो संबंधित जिले के सीएमओ इसके लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार होंगे। प्रमुख सचिव ने कहा कि अगर समय पर वाहन उपलब्ध नहीं है तो मृतक के परिजनों से तीन घंटे का समय लेकर वाहन उपलब्ध कराया जाए। इसके बाद यदि वह अपने साधन से शव ले जाना चाहते हैं तो उनसे लिखित लिया जाए, ताकि बाद में विभाग पर आरोप न लगें और सरकार की किरकिरी न हो।
सीएचसी-पीएचसी पर नहीं है सुविधा
फिलहाल जिला स्तरीय अस्पतालों में ही शव वाहन उपलब्ध हैं। सीएचसी-पीएचसी में शव वाहन की सुविधा नहीं है। शासन ने अब जिला स्तरीय अस्पतालों के साथ सीएचसी-पीएचसी पर भी शव वाहन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
जिले को मिला एक और वाहन
शासन ने सुविधा के विस्तार के क्रम में जिले को एक और शव वाहन दिया है। इसका उपयोग सीएचसी एवं पीएचसी में भर्ती मरीज की मौत होने पर शव ले जाने के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी की देखरेख में किया जाएगा।
कोट
शासन के निर्देश पर अब जिले के सभी सरकारी चिकित्सालयों में शव वाहन की सुविधा सरकारी एंबुलेंस की तरह निशुल्क मिलेगी। लोगों की मांग पर समय से शव वाहन उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए सभी अधीनस्थों को निर्देशित कर दिया गया है। - डॉ. सुष्पेन्द्र कुमार, प्रभारी सीएमओ